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फ्रैक्चर कितने प्रकार के होते हैं? जानें कारण और ट्रीटमेंट

फ्रैक्चर कितने प्रकार के होते हैं? जानें कारण और ट्रीटमेंट

    फ्रैक्चर (fracture in hindi) यानी हड्डियों का टूटना, ये परेशानी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है। टूटी हुई हड्डियों की पहचान हल्के क्रेक होने से भी हो जाती है, लेकिन कई केसों में ये पूरी तरह से चकनाचूर हो जाती है। किसी को फ्रैक्चर तब होता है जब हम जरूरत से ज्यादा वजन वाली चीजें उठा लेता है, अधिक भार ना उठा पाने के कारण हड्डियों पर जोर पड़ता है और वह टूट जाती है। इसके अलावा कई बार बच्चे खेलकूद के दौरान गिर जाते हैं जिसके कारण हाथ पैरों या हड्डियों में चोट लग जाती है और हड्डी क्रेक हो जाती है।

    fracture types in hindi

    फ्रेक्चर के प्रकार (fracture types)

    फ्रेक्चर्स को कई प्रकारों में बांटा गया है जैसे- 

    1.ट्रांसवर्स फ्रैक्चर (Transverse Fracture)

    ट्रांसवर्स फ्रैक्चर में हड्डी जो सीधे जाती है वो दबाव के कारण टूट जाती है।  

    2.टोरस फ्रैक्चर (Buckle Fracture)

    फ्रैक्चर के इस प्रकार में हड्डी मुड़ जाती है लेकिन टूटने की नोबत नहीं आती है, इस तरह का फ्रैक्चर बच्चों में होना आम बात है, क्योंकि बच्चे अक्सर खेलकूद के दौरान गिर जाते हैं जिसके कारण उन्हें चोट आ जाती हैं या हड्डियां मुड़ जाती हैं। 

    3.स्ट्रेस फ्रैक्चर (Stress Fracture) 

    जो व्यक्ति एथलीटों से या किसी खेल जगत से जुड़ा होता है उनमें स्ट्रेस फ्रैक्चर होना आम बात है, इस प्रकार के फ्रैक्चर में खिलाड़ी के हड्डी में स्ट्रेन आ जाती है जिसके कारण वो टूट जाता है।  

    4.पैथोलॉजिकल फ्रैक्चर (Pathological Fracture) 

    व्यक्ति में इस टाइप का फ्रैक्चर तभी होता है जब किसी बीमारी के कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, ऐसे में कमजोर हड्डी अपने आप ही टूट जाती है। 

    5.स्पाइरल फ्रैक्चर (Spiral Fracture) 

    इस फ्रैक्चर में हड्डी का कोई एक हिस्सा मुड़ जाता है, इस टाइप के फ्रैक्चर में काफी तकलीफ़ होती है।  

    6.प्रभावित फ्रैक्चर (Impacted Fracture) 

    ये फ्रैक्चर काफी दर्दनाक होता है, इस फ्रैक्चर में हड्डी का एक हिस्सा टूटकर दूसरे हड्डी के अंदर घुस जाता है। 

    7.इंट्राआर्टिकुलर फ्रैक्चर (Intraarticular Fracture) 

    इंट्राआर्टिकुलर फ्रैक्चर में जॉइंट की सतह पर फ्रैक्चर आ जाता है, जैसे कोहनी, घुटने आदि। 

    8.ग्रीनस्टिक फ्रैक्चर (Greenstick Fracture) 

    इस फ्रैक्चर में हड्डी एक तरफ से फ्रैक्चर हो जाती है, लेकिन ये ऐसी स्थिति होती है जब हड्डी पूरी तरह से नहीं टूटती है बल्कि झुक जाती है। ये फ्रैक्चर बच्चों में बहुत जल्दी होता है, क्योंकि बच्चों की हड्डियों में लचीलापन ज्यादा होता है।  

    9.कम्प्रेशन फ्रैक्चर (Crush Fracture) 

    कम्प्रेशन फ्रैक्चर ज्यादातर रीढ़ की हड्डी में होता है। जिन लोगों की रीढ़ की हड्डी कमजोर हो जाती हैं उनमें इस तरह का फ्रैक्चर होना आम बात है। 

    10.फ्रैक्चर डिसलोकेशन (Fracture Dislocation)

    इस  फ्रैक्चर में हड्डियों का जॉइंट डिसलोकेट हो जाता है लेकिन फ्रैक्चर सिर्फ एक हड्डी में आता है। फ्रैक्चर डिसलोकेशन में पीड़ित व्यक्ति को काफी दर्द सहना पड़ता है। 

    11.अलगाव फ्रैक्चर (Avulsion Fracture) 

    इस फ्रैक्चर में मांसपेशियों और लिगामेंट में खिंचाव हो जाता है, जिसके कारण फैक्चर हो जाता है। 

    12.कम्यूटेड फ्रैक्चर (Comminuted Fracture)

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    कम्यूटेड फ्रैक्चर में हड्डियां कई टुकड़ों में बिखर जाती हैं। 

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    फ्रैक्चर के कारण  (fracture causes)

    आमतौर पर फ्रैक्चर बुरी तरह गिरने या एक्सीडेंट के कारण ही होता है। दरअसल व्यक्ति की हड्डियां बेहद सख्त और लचीली होती हैं जब ये हड्डियां किसी शक्तिशाली दबाव में आती हैं तो फ्रैक्चर हो जाता है। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ साथ हड्डियां कमजोर हो जाती हैं जिसके कारण फ्रैक्चर होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। साथ ही बच्चों में फ्रैक्चर जैसी दिक्कतें होना आम बात है क्योंकि बच्चे शारिरिक रूप से काफी ज्यादा सक्रिय रहते हैं जिसके कारण कई बार उन्हें चोट लग जाती है। 

    इसके अलावा हड्डियों में ज्यादा तनाव पड़ने से भी ये स्थिति आ जाती है खासकर खिलाड़ियों के हड्डियों में ज्यादा तनाव आते हैं। 

    फ्रैक्चर का इलाज (fracture treatment)

    1.फ़्रैक्चर में प्लास्टर कास्ट या प्लास्टिक क्रिया आम है, इस स्थिति में प्लास्टर हड्डी को तब तक दबाए रखते हैं जब तक की वो ठीक न हो जाए।

    2.जब फ्रैक्चर के बाद किसी की हड्डियां काम करने लायक नहीं बचती और हड्डियां पूरी तरह बिखर जाती हैं तो उस स्थिति में धातु प्लेटें लगाई जाती हैं, जिससे हड्डियां दोबारा जुड़ सके। 

    3.जब कोई लम्बी हड्डी टूटती है तो लंबी हड्डियों के केंद्र के नीचे एक प्लेट रखा जाता है, इस तरह के ट्रीटमेंट के लिए बच्चों में लचीले तारों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    फ्रैक्चर में प्लास्टर के बाद हड्डी को 2 से 8 सप्ताह तक छोड़ दिया जाता है, लेकिन ये इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर में हड्डियों का कौनसा हिस्सा प्रभावित है। जैसे बच्चों की हाथ पैर की हड्डियां जल्दी जुड़ जाती हैं।

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