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जानें हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में जरूरी अंतर: सही जानकारी से कम होगी जोखिम

By Priyambda Sahay

Reviewed by : Ujala Cygnus

March 26, 2026

दिल की बीमारी भारत और दुनिया भर में मौत के मुख्य कारणों में से एक बनती जा रही है। भारत में यह स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि हार्ट अटैक के कई मरीज़ समय पर हॉस्पिटल नहीं पहुँच पाते हैं। डॉक्टरों का अनुमान है कि हार्ट अटैक से होने वाली लगभग 70% मौतें मेडिकल मदद मिलने से पहले ही हो जाती हैं, क्योंकि अक्सर लोग इससे जुड़ी चेतावनी के संकेतों को पहचान नहीं पाते हैं। उन्हें पता भी नहीं होता कि शुरुआती कुछ ज़रूरी मिनटों में क्या करना है।

इससे भी गंभीर बात यह है कि अधिकांश लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के अंतर को समझ नहीं पाते हैं और वे इन शब्दों का इस्तेमाल एक-दूसरे की जगह करते हैं। हालांकि यह जानना जरूरी है कि ये दोनों एक दूसरे से काफी अलग मेडिकल कंडीशन हैं। अगर इनके अंतर को समय रहते समझा जाए और इलाज शुरू किया जाए तो इससे मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ सकती है।

आसान शब्दों में, हार्ट अटैक एक सर्कुलेशन प्रॉब्लम है, जो तब होती है जब दिल की मांसपेशियों में, कोरोनरी आर्टरीज़ में क्लॉट के कारण खून का बहाव रुक जाता है। दूसरी ओर, कार्डियक अरेस्ट एक इलेक्ट्रिकल प्रॉब्लम है, जिसमें दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में रुकावट के कारण अचानक धड़कना बंद हो जाता है।

उजाला सिग्नस ब्राइटस्टार हॉस्पिटल, मुरादाबाद में कार्डियक साइंसेज के चेयरमैन डॉ. प्रो. संदीप मिश्रा, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच मुख्य अंतर, उनके चेतावनी के संकेत और मेडिकल इमरजेंसी के दौरान जान बचाने में मददगार उपायों के बारे में यहां विस्तार से जानकारी दी है।

हार्ट अटैक क्या है?

हार्ट अटैक तब होता है जब कोरोनरी आर्टरीज़, जो दिल की मांसपेशियों को खून पहुंचाती हैं, ब्लॉक हो जाती हैं। यह ब्लॉकेज ऑक्सीजन वाले खून को दिल की मांसपेशियों तक पहुंचने से रोकता है, जिससे दिल के टिश्यू को नुकसान होता है। हार्ट अटैक आमतौर पर सिकुड़ी हुई आर्टरीज़ में खून के थक्के बनने की वजह से होता है, जो अक्सर कोलेस्ट्रॉल जमा होने की वजह से होता है।

हार्ट अटैक के आम लक्षण

छाती में भारी दबाव या दर्द

छाती पर भारी वजन या पत्थर जैसा महसूस होना

सांस लेने में दिक्कत या सांस फूलना

ठंडा पसीना आना या बेचैनी

अगर ये लक्षण दिखें, तो तुरंत मेडिकल मदद लेना ज़रूरी है।

कार्डियक अरेस्ट क्या है?

कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब दिल में इलेक्ट्रिकल खराबी की वजह से दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है। इससे दिल की धड़कन में रुकावट आती है, जिससे वह दिमाग और दूसरे ज़रूरी अंगों में खून पंप नहीं कर पाता।

हार्ट अटैक के उलट, कार्डियक अरेस्ट अचानक होता है और अक्सर इससे इंसान बेहोश हो जाता है।

कार्डियक अरेस्ट के लक्षण

अचानक गिरना

पल्स नहीं चलना

सांस नहीं लेना

बेहोशी

तुरंत मदद न मिलने पर, कार्डियक अरेस्ट से कुछ ही मिनटों में मौत हो सकती है।

क्या हार्ट अटैक की वजह से कार्डियक अरेस्ट हो सकता है?

हाँ। कई मामलों में, हार्ट अटैक से कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। जब हार्ट अटैक से दिल की मसल्स डैमेज होती हैं, तो यह दिल के इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स में रुकावट डाल सकता है, जिससे दिल की रिदम इर्रेगुलर या अस्त-व्यस्त हो सकती है जिससे कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।

हालांकि, हर हार्ट अटैक से कार्डियक अरेस्ट नहीं होता और हर कार्डियक अरेस्ट हार्ट अटैक की वजह से नहीं होता।

अगर किसी को हार्ट अटैक हो जाए तो आपको क्या करना चाहिए?

हार्ट अटैक से ज़्यादातर मौतें अक्सर हॉस्पिटल पहुँचने से पहले ही हो जाती हैं। इसलिए हार्ट अटैक के लक्षण समझ आते ही जल्दी जरूरी कदम उठाना जरूरी होता है। अगर समय रहते इनपर अमल किया जाए तो मरीज की जान बच सकती है।

हार्ट अटैक के लक्षण नजर आए तो उठाए ये जरूरी कदम

तुरंत सारी फिजिकल एक्टिविटी बंद कर दें और आराम करें।

तुरंत मेडिकल हेल्प या एम्बुलेंस को कॉल करें।

दिल पर स्ट्रेस कम करने के लिए फालतू बात करने से बचें।

परिवार के सदस्यों या आस-पास के लोगों को तत्काल जानकारी दें।

ब्लड क्लॉट बनने से रोकने में मदद के लिए एस्पिरिन की एक टैबलेट (अगर एलर्जी नहीं है) चबाएं।

खड़े होने या लेटने के बजाय पीठ के सहारे आराम से बैठें।

शांत रहें और धीरे-धीरे सांस लें।

जितनी जल्दी हो सके मेडिकल मदद लें।

ये आसान काम मरीज तक मेडिकल सहायता पहुंचने तक जोखिम के खतरे को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं और बचने की उम्मीद को काफी बढ़ा सकते हैं।

क्या लाइफस्टाइल में बदलाव से हार्ट डिजीज कैसे रोक सकते हैं?

स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर ह्रद्य रोग के खतरों को काफी कम किया जा सकता है।

अपने दिल को बचाने के लिए जरूरी कदम

रोज़ कम से कम 30 मिनट टहलें या दिन में 8,000–10,000 कदम चलने का लक्ष्य रखें

तली हुई चीज़ें और ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट से बचें

ज़्यादा फल, सब्ज़ियाँ और नट्स खाएँ

स्मोकिंग और शराब पीना छोड़ दें

योग या मेडिटेशन से स्ट्रेस मैनेज करें

डायबिटीज़, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करें

एक्सपर्ट्स के अनुसार, लाइफ़स्टाइल में बदलाव करके दिल की बीमारी के 70–80% मामलों को रोका जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में मुख्य अंतर क्या है?

हार्ट अटैक दिल की मसल्स में ब्लड फ़्लो के ब्लॉक होने की वजह से होता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट इलेक्ट्रिकल प्रॉब्लम की वजह से होता है जो दिल को धड़कने से रोकती है।

2. क्या हार्ट अटैक से कार्डियक अरेस्ट हो सकता है?

हाँ। एक गंभीर हार्ट अटैक दिल की मसल्स को नुकसान पहुँचा सकता है और इलेक्ट्रिकल सिग्नल को बाधित कर सकता है, जिससे कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।

3. हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

आम लक्षणों में सीने में दबाव, सांस लेने में तकलीफ, ठंडा पसीना आना, जी मिचलाना और सीने या शरीर के ऊपरी हिस्से में तकलीफ़ शामिल हैं।

4. हार्ट अटैक आने पर व्यक्ति को तुरंत क्या करना चाहिए?

उन्हें कोई काम करना बंद कर देना चाहिए, आराम से बैठ जाना चाहिए, इमरजेंसी मेडिकल हेल्प को कॉल करना चाहिए और अगर डॉक्टर ने सलाह दी हो तो एस्पिरिन चबानी चाहिए।

5. क्या दिल की बीमारी से बचा जा सकता है?

हाँ। नियमित व्यायाम, पौष्टिक भोजन, धूम्रपान छोड़ना, तनाव को नियंत्रित करना और मधुमेह या उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियों को काबू में रखना, दिल की बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।

यदि आपको दिल की बीमारी के लक्षण महसूस होते हैं या आपको अपने दिल के स्वास्थ्य को लेकर कोई चिंता है, तो अपने नज़दीकी उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स ( में किसी हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) से परामर्श करें। आप हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञों से askadoctor@ujalacygnus.com पर भी संपर्क कर सकते हैं, या डॉ. प्रो. संदीप मिश्रा से अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए यहाँ क्लिक करें।

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