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लक्षण आने से पहले ही पहचानें बीमारी: जानिए 5 जरूरी हेल्थ स्क्रीनिंग

By Priyambda Sahay

Reviewed by : Ujala Cygnus

April 9, 2026

रोज़मर्रा की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में, हेल्थ चेक-अप को अक्सर तब तक टाल दिया जाता है जब तक कोई समस्या सामने न आ जाए। हालाँकि, डायबिटीज़, दिल की बीमारी, इन्फेक्शन और यहाँ तक कि कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियाँ शुरुआती दौर में बिना किसी खास लक्षण के चुपचाप पनप सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि हमें अपनी सेहत का ख्याल रखना, बीमारी होने से पहले ही शुरू कर देना चाहिए।

प्रिवेंटिव हेल्थ स्क्रीनिंग आपको बीमारियां दूर रखने और संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का जल्दी पता लगाने में मदद करती है। इसके जरिए कभी-कभी लक्षण दिखने से कई साल पहले ही हमें बीमारियों का पता चल जाता है। जिससे बीमारी का इलाज आसान, ज़्यादा असरदार और कम खर्चीला हो जाता है।

डॉक्टर इस बात पर ज़ोर देते हैं कि प्रिवेंटिव स्क्रीनिंग लंबे समय तक सेहतमंद रहने के सबसे असरदार तरीकों में से एक है। रेगुलर हेल्थ चेक-अप न सिर्फ़ बीमारियों का जल्दी पता लगाने में मदद करते हैं, बल्कि जीवनशैली में सुधार, बेहतर पोषण और गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में भी मददगार होते हैं।

उजाला सिग्नस संजीव बंसल हॉस्पिटल, करनाल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. आबिद अमीन भट के अनुसार, “प्रिवेंटिव हेल्थकेयर सिर्फ़ मेडिकल टेस्ट के बारे में नहीं है; यह एक सेहतमंद ज़िंदगी के लिए सोच-समझकर फ़ैसले लेने के बारे में है। ज़्यादातर लोग मेडिकल मदद तभी लेते हैं जब कुछ गड़बड़ हो जाती है, लेकिन हेल्थकेयर की असली ताकत बीमारी शुरू होने से पहले ही उसे रोकने में है। रेगुलर चेक-अप, अच्छा पोषण, समय पर टीकाकरण और एक एक्टिव जीवनशैली ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो जान बचा सकते हैं। आपकी भविष्य की सेहत उन फ़ैसलों पर निर्भर करती है जो आप आज लेते हैं।”

अगर आप अपने सेहत देखभाल के लिए निर्णय ले रहे हैं, तो यहाँ पाँच ज़रूरी हेल्थ स्क्रीनिंग दी गई हैं जो आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

1. टीकाकरण और वैक्सीन स्क्रीनिंग (Immunization and Vaccine Screening)

टीकाकरण सिर्फ़ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि वयस्कों के लिए भी ज़रूरी है। कई संक्रामक बीमारियों और कुछ खास तरह के कैंसर को समय पर टीकाकरण के ज़रिए रोका जा सकता है। वयस्कों को HPV वैक्सीन (सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए), हेपेटाइटिस B वैक्सीन, इन्फ़्लूएंज़ा वैक्सीन और टिटनेस बूस्टर शॉट जैसी वैक्सीनों के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। ये वैक्सीन उन इन्फेक्शन से बचाने में मदद करती हैं जिनसे कैंसर और पुरानी बीमारियों जैसी गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएँ हो सकती हैं।

रेगुलर वैक्सीन यह पक्का करती है कि एक व्यक्ति अपनी पूरी ज़िंदगी में सुरक्षित रह सके। वैक्सीन के बारे में अपडेट रहने से उन इन्फेक्शन को रोकने में भी मदद मिल सकती है जिनसे कई दफा अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है।

2. संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों की स्क्रीनिंग (Screening for Infectious and Non-Communicable Diseases)

आधुनिक जीवनशैली(लाइफस्टाइल) के कारण गैर-संक्रामक बीमारियों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। वहीं संक्रामक रोगों और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। इस समस्याओँ को रोकने में शुरुआती पहचान (Early Screening) की अहम भूमिका होती है।

भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए, वयस्कों के लिए ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर की रेगुलर जाँच करवाना ज़रूरी हो गया है। नियमित स्वास्थ्य जांच में डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, दिल की बीमारी, टीबी, लिवर के काम करने की क्षमता, हेपेटाइटिस और दूसरे इन्फेक्शन के टेस्ट शामिल हो सकते हैं। ये टेस्ट लक्षणों के दिखने से पहले ही स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करने में सहायक होते हैं, जिससे डॉक्टर जल्दी इलाज शुरू कर पाते हैं और लंबे समय तक रहने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम कर पाते हैं।

3. पोषण की कमी की जांच

सही पोषण बनाए रखना स्वास्थ्य देखभाल का एक अहम हिस्सा है। कई वयस्क खराब खान-पान, तनाव या जीवनशैली से जुड़े कारणों की वजह से पोषण की कमी से जूझते हैं। थकान, कमज़ोर इम्यूनिटी, बालों का झड़ना और ध्यान न लगा पाना जैसे लक्षण अक्सर छिपी हुई पोषण की कमियों से जुड़े होते हैं। व्यस्त दिनचर्या, खाने के अनियमित समय और तनाव की वजह से, कई वयस्क अनजाने में विटामिन D की कमी, आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया और विटामिन B12 की कमी जैसी समस्याओं से जूझते हैं।

एक साधारण ब्लड टेस्ट इन कमियों का पता लगाने में मदद कर सकता है। डॉक्टर पोषण के सही स्तर को वापस पाने और थकान, कमज़ोर इम्यूनिटी और दूसरी लंबे समय तक रहने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए संतुलित आहार, जीवनशैली में बदलाव या सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं।

4. कैंसर की जांच

कैंसर के मामले में, शुरुआती पहचान से जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। अगर कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो कई तरह के कैंसर का सफल इलाज किया जा सकता है और मरीज़ के ठीक होने की संभावना भी ज़्यादा होती है। इसलिए उम्र, लिंग और जोखिम कारकों के आधार पर, डॉक्टर इन जांचों की सलाह देते हैं:

सर्वाइकल कैंसर के लिए पैप स्मीयर या HPV टेस्ट

ब्रेस्ट कैंसर के लिए मैमोग्राफी

कोलोरेक्टल कैंसर की जांच

मुंह के कैंसर की जांच, खासकर तंबाकू का सेवन करने वालों के लिए

5. काम से जुड़े स्वास्थ्य की जांच

आपका कार्यस्थल भी आपके स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। स्वास्थ्य सेवा, फैक्ट्रियों, प्रयोगशालाओं और औद्योगिक वातावरण में काम करने वाले लोगों को इन्फेक्शन, केमिकल, शोर या शारीरिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।

काम से जुड़े स्वास्थ्य की नियमित जांच इन समस्याओं का पता लगाने में मदद करती है:

सांस से जुड़ी समस्याएं

मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़े विकार

काम से जुड़े इन्फेक्शन

तनाव और थकान

उदाहरण के लिए, स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों को संक्रामक बीमारियों का खतरा हो सकता है, जबकि फैक्ट्री में काम करने वालों को मशीनों या काम करने के तरीके (posture) से जुड़े जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य की नियमित निगरानी कार्यस्थल पर सुरक्षा और लंबे समय तक अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने में मदद करती है।

अगर आपके पास भी प्रीवेंटिव हेल्थ से जुड़े कोई सवाल हैं, तो अपने नज़दीकी उजाला सिग्नस हॉस्पिटल में डॉक्टर से सलाह लें। आप हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञों से askadoctor@ujalacygnus.com पर भी संपर्क कर सकते हैं, या डॉ. आबिद अमीन भट से अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए हमसे संपर्क करें।

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