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मोटापा: गंभीर बीमारियों की जड़, जानें कारण और इसके दुष्प्रभाव

By Priyambda Sahay

Reviewed by : Ujala Cygnus

मोटापा दुनिया भर में लोगों को प्रभावित करने वाली सबसे आम स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। यह तब होता है जब शरीर में अत्यधिक चर्बी जमा हो जाती है, जिससे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। हालाँकि, कई लोग मोटापे को केवल वज़न से जुड़ी समस्या मानते हैं, लेकिन यह एक जटिल मेडिकल स्थिति है जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डाल सकती है। अस्वस्थ खान-पान की आदतें, शारीरिक गतिविधि की कमी, आनुवंशिक कारण, तनाव और कुछ मेडिकल कंडीशन भी वज़न बढ़ाने में योगदान देते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मोटापा शरीर में असामान्य या अत्यधिक चर्बी क जमाव है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है। मोटापे को आमतौर पर बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के जरिए मापा जाता है25 या उससे अधिक का BMI होने पर व्यक्ति को 'अधिक वज़न वाला' (overweight) माना जाता है, और 30 या उससे अधिक का BMI होने पर उसे 'मोटा' (obese) माना जाता है। भारत में, किसी व्यक्ति को 'अधिक वज़न वाला' तब माना जाता है जब उसका बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 23.0 और 24.9 kg/m² के बीच हो, और 'मोटा' तब माना जाता है जब उसका BMI 25 kg/m² या उससे अधिक हो। 'अति-मोटापा' (Morbid obesity) तब होता है जब किसी व्यक्ति का BMI 35 या उससे अधिक हो।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS)-5 (2019-21) के अनुसार, 24% भारतीय महिलाएँ और 23% भारतीय पुरुष 'अधिक वज़न वाले' या 'मोटे' हैं। 5 वर्ष से कम उम्र के उन बच्चों के प्रतिशत में भी वृद्धि हुई है जिनका वज़न (ऊंचाई के अनुपात में) अधिक हैयह 2.1% से बढ़कर 3.4% हो गया है। इस संदर्भ में, आगरा के उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल के लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. इंदरपाल सिंह ने मोटापे से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दिए हैं। उनके मुतिबक सही जीवनशैली के चुनाव और डॉक्टर की सलाह से इसे रोका और नियंत्रित किया जा सकता है।

क्या मोटापा सिर्फ़ ज़्यादा खाने से होता है?

नहीं, ज़्यादा खाना सिर्फ़ एक वजह है। मोटापा कई कारणों से होने वाली बीमारी है। इसके मुख्य कारण हैं:

1. खान-पान: ज़्यादा कैलोरी वाला खाना, मीठे पेय पदार्थ, फ़ास्ट फ़ूड।

2. शारीरिक गतिविधियों की कमी: सुस्त जीवनशैली, स्क्रीन के सामने ज़्यादा समय बिताना।

3. हार्मोनल समस्याएँ।

4. हाइपोथायरायडिज्म, कुशिंग सिंड्रोम, इंसुलिन रेजिस्टेंस।

5. स्टेरॉयड्स, एंटीडिप्रेसेंट्स, एंटीसाइकोटिक्स दवाएँ।

6. नींद और तनाव: कम नींद से भूख बढ़ाने वाले हार्मोन बढ़ जाते हैं। तनाव के कारण लोग ज़्यादा खाने लगते हैं (इमोशनल ईटिंग)।

7. वातावरण: अस्वस्थ खाने की चीज़ों की आसानी से उपलब्धता

इसमें जीन्स (आनुवंशिकी) की क्या भूमिका होती है?

मोटापे से जुड़े जीन्स की इसमें अहम भूमिका हो सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से वज़न तय नहीं करता। शोध बताते हैं कि मोटापे का 40 से 70 प्रतिशत जोखिम जेनेटिक हो सकता है। कुछ खास जीन्स भूख, मेटाबॉलिज्म, शरीर में चर्बी जमा होने और पेट भरने के संकेतों को प्रभावित करते हैं। ऐसा ही एक जाना-माना जीन है FTO जीन, जिसका संबंध मोटापे के ज़्यादा जोखिम से है। हालाँकि जिन लोगों में मोटापे से जुड़े जीन्स होते हैं, वे भी सही खान-पान, शारीरिक गतिविधियों और अच्छी आदतों की मदद से अपना वज़न सीमित कर सकते हैं।

मोटापे के क्या दुष्प्रभाव होते हैं?

मोटापा शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करता है।

1. हृदय संबंधी समस्याएँ: दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, हाई कोलेस्ट्रॉल।

2. मेटाबॉलिक बीमारियाँ: टाइप 2 डायबिटीज़, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, फ़ैटी लिवर की बीमारी।

3. साँस संबंधी समस्याएँ: स्लीप एपनिया, साँस लेने में तकलीफ़; साथ ही जोड़ों की समस्याएँ, ऑस्टियोआर्थराइटिस, पीठ दर्द और घुटनों को नुकसान।

4. प्रजनन संबंधी समस्याएँ: बांझपन, महिलाओं में PCOS, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन)

5. कैंसर का जोखिम: स्तन कैंसर, कोलन कैंसर और एंडोमेट्रियल कैंसर का ज़्यादा जोखिम।

6. गंभीर मोटापे के कारण जीवनकाल 5 से 10 साल तक कम भी हो सकता है।

क्या मोटापा बच्चों के मानसिक विकास को भी प्रभावित करता है?

हाँ, मोटापा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और विकास दोनों को प्रभावित कर सकता है। उनपर इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ता है। मोटापे से जुझ रहे बच्चों में सामाजिक अलगाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ये समस्याएं उनके आत्मविश्वास, व्यक्तित्व के विकास और सीखने की क्षमता पर गहरा असर डाल सकती हैं। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि इसका संबंध ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी, याददाश्त की समस्याओं और शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट से है। इसके अलावा मोटे बच्चों में बड़े होने पर भी मोटापे का शिकार होने और जीवन के शुरुआती दौर में ही पुरानी (chronic) बीमारियों की चपेट में आने की संभावना अधिक होती है।

किसी व्यक्ति को मोटा कब माना जाता है?

डॉक्टर आमतौर पर शरीर के वजन को 'बॉडी मास इंडेक्स' (Body Mass Index) के आधार पर वर्गीकृत करते हैं, जिसे संक्षेप में BMI कहा जाता है। BMI की गणना करने के लिए, व्यक्ति के वजन (किलोग्राम में) को उसकी ऊंचाई (मीटर में) के वर्ग (square) से विभाजित किया जाता है।

WHO के मानकों के अनुसार BMI की श्रेणियां: 18.5 से कम BMI को 'कम वजन' (underweight) माना जाता है। 18.5 से 24.9 के बीच के BMI को 'सामान्य वजन' माना जाता है। 25 से 29.9 के बीच के BMI को ज़्यादा वज़न वाला (overweight) माना जाता है, और 30 या उससे ज़्यादा BMI को मोटापे (obese) की श्रेणी में रखा जाता है। इसलिए, जब किसी व्यक्ति का BMI 30 या उससे ज़्यादा हो जाता है, तो वह ज़्यादा वज़न वाली श्रेणी से निकलकर मोटापे वाली श्रेणी में आ जाता है। एशियाई आबादी, जिसमें भारतीय भी शामिल हैं, के लिए मोटापे का जोखिम थोड़े कम BMI स्तर पर ही शुरू हो जाता है।

अगर आपके मन में मोटापे से जुड़े कोई सवाल हैं, तो अपने नज़दीकी उजाला सिग्नस हॉस्पिटल में किसी डॉक्टर से सलाह लें, या हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जुड़ने के लिए askadoctor@ujalacygnus.com पर ईमेल करें। लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. इंदरपाल सिंह से अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए यहाँ क्लिक करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. मोटापा क्या है?

मोटापा एक ऐसी मेडिकल स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति के शरीर में ज़रूरत से ज़्यादा फ़ैट जमा हो जाता है, जिससे उसे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।

2. मोटापे को कैसे मापा जाता है?

डॉक्टर आमतौर पर बॉडी मास इंडेक्स (BMI) का इस्तेमाल करके मोटापे को मापते हैं; इसकी गणना व्यक्ति की लंबाई और वज़न के आधार पर की जाती है। मोटापे का आकलन करने के लिए वे कमर का घेरा, शरीर में फ़ैट का प्रतिशत, और व्यक्ति की पूरे स्वास्थ्य स्थिति को भी माप सकते हैं। 30 या उससे ज़्यादा BMI को मोटापे की श्रेणी में रखा जाता है।

3. मोटापे से जुड़ी कौन-कौन सी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं?

मोटापे के कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है, जैसे कि दिल की बीमारी, टाइप 2 डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, जोड़ों में दर्द और ऑस्टियोआर्थराइटिस, स्लीप एपनिया, फ़ैटी लिवर की बीमारी, कुछ खास तरह के कैंसर, आदि।

4. कोई व्यक्ति सुरक्षित तरीके से अपना वज़न कैसे कम कर सकता है?

सुरक्षित तरीके से वज़न कम करने के लिए पौष्टिक भोजन, नियमित शारीरिक व्यायाम, खाने की मात्रा पर नियंत्रण (portion control), और जीवनशैली में बदलाव करना ज़रूरी है। कुछ खास मामलों में डॉक्टर पोषण संबंधी परामर्श (nutrition counseling), दवाएँ, या बैरिएट्रिक सर्जरी करवाने की सलाह भी दे सकते हैं।

5. मोटापे के संबंध में किसी व्यक्ति को डॉक्टर से सलाह कब लेनी चाहिए?

अगर किसी व्यक्ति का BMI 30 से ज़्यादा है, या उसका वज़न बिना किसी स्पष्ट कारण के बढ़ रहा है, या उसे वज़न कम करने में मुश्किल हो रही है, या फिर उसे मोटापे से जुड़ी कोई स्वास्थ्य समस्या (जैसे डायबिटीज़ या हाई ब्लड प्रेशर) है, तो उसे डॉक्टर से सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।

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