
दिल की अनियमित धड़कन(एरिथमिया) को न करें नजरअंदाज— समय पर पहचान और सही उपचार है बेहद जरूरी
By Priyambda Sahay
Reviewed by : Ujala Cygnus
September 21, 2026
क्या कभी आपको अचानक महसूस हुआ है कि आपका दिल बहुत तेज़ धड़क रहा है? कभी ऐसा लगा है कि दिल कुछ पल के लिए “फड़फड़ाने” लगा है या धड़कन का तालमेल बिगड़ गया है? कई बार ऐसी स्थिति कुछ समय के लिए होती है और अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन कुछ मामलों में यह हार्ट एरिथमिया (
Heart Arrhythmia)
का संकेत हो सकती है।
हार्ट एरिथमिया का मतलब है दिल की धड़कन का असामान्य या अनियमित होना
। यह तब होता है जब दिल की धड़कनों को नियंत्रित करने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नल ठीक तरह से काम नहीं करते। इसके कारण दिल बहुत तेज़, बहुत धीमा या अनियमित तरीके से धड़क सकता है और सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है। एरिथमिया गंभीर भी हो सकती है। इसलिए लक्षणों को समझना और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल, पानीपत के ह्रद्य रोग विशेषज्ञ(कार्डियोलॉजिस्ट) डॉ मनदीप सिंह ने एरिथमिया से संबंधित कई महत्पूर्ण सवालों का जवाब दिया है।
डॉ मनदीप सिंह के मुताबिक यह जरूरी नहीं कि हर तेज या धीमी धड़कन एरिथमिया होती है। कुछ परिस्थितियों में दिल की धड़कन का तेज़ या धीमा होना सामान्य शरीर की प्रतिक्रिया हो सकती है। उदाहरण के लिए, व्यायाम या शारीरिक मेहनत के दौरान दिल की धड़कन तेज़ हो सकती है
, जबकि सोते समय यह धीमी हो सकती है।
इसी तरह, फिट और शारीरिक रूप से सक्रिय लोगों में आराम की स्थिति में दिल की धड़कन 60 बीट प्रति मिनट से कम भी हो सकती है और फिर भी यह सामान्य हो सकती है। इसलिए केवल हृदय गति की एक संख्या देखकर किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। बल्कि डॉक्टर की परामर्श पर जाँच और सही इलाज शुरू करना चाहिए।
हार्ट एरिथमिया के लक्षण क्या हैं
?
कई बार एरिथमिया में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता
। कुछ लोगों में इसका पता नियमित स्वास्थ्य जाँच या किसी अन्य जाँच के दौरान चलता है।
जहाँ लक्षण दिखाई देते हैं, वहाँ मरीज को दिल की धड़कन तेज़, बहुत जोर से या फड़फड़ाती हुई महसूस हो सकती है। इसके साथ सीने में दर्द
,
सांस लेने में तकलीफ
,
बहुत अधिक थकान
,
बेचैनी
,
सिर हल्का लगना
,
चक्कर आना
,
पसीना आना या बेहोशी जैसा महसूस होना
भी हो सकता है।
खास तौर पर यदि धड़कन की समस्या के साथ सीने में दर्द
,
सांस लेने में गंभीर परेशानी
,
बेहोशी या बेहोशी जैसा महसूस होना
हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए और तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
हार्ट एरिथमिया के मुख्य प्रकार कौन से हैं
?
एरिथमिया मुख्य रुप से दो प्रकार की होती है।
टैकीकार्डिया (
Tachycardia)
जब आराम की स्थिति में हृदय की गति 100
बीट प्रति मिनट से अधिक
हो, तो इसे टैकीकार्डिया कहा जाता है। इसमें मरीज को दिल के बहुत तेज़ धड़कने या धड़कन महसूस होने की शिकायत हो सकती है।
ब्रैडीकार्डिया (
Bradycardia)
जब आराम की स्थिति में हृदय की गति 60
बीट प्रति मिनट से कम
हो, तो इसे ब्रैडीकार्डिया कहा जाता है। लेकिन कम हृदय गति हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होती। खासकर शारीरिक रूप से फिट लोगों में यह सामान्य भी हो सकती है। समस्या तब हो सकती है जब धीमी धड़कन के कारण शरीर और मस्तिष्क तक पर्याप्त रक्त पहुंचना प्रभावित हो और मरीज को कमजोरी, चक्कर या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों।
इसके अलावा एट्रियल फाइब्रिलेशन (
Atrial Fibrillation)
भी है।
जब हृदय के ऊपरी चैबंर की एक अनियमित और अक्सर तेज़ गति व लय होती है, तो इसे एट्रियल फाइब्रिलेशन या AFib
कहा जाता है। कुछ मरीजों में इससे स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है
। इसलिए इसका मेडिकल इवेल्यूएशन करना जरूरी है।
एरिथमिया क्यों होती है
?
एरिथमिया इलेक्ट्रिकल सिग्नल में गड़बड़ी के कारण होती है। इसलिए बार-बार होने वाली तेज़, धीमी या अनियमित धड़कन को केवल तनाव या थकान मानकर छोड़ना उचित नहीं है। डॉक्टर जाँच के बाद यह तय करते हैं कि धड़कन में बदलाव सामान्य है या किसी हृदय संबंधी समस्या का संकेत है।
एरिथमिया का पता लगाने के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री का मूल्यांकन करते हैं तथा आवश्यकतानुसार हृदय की लय की जांच करते हैं। चूंकि एरिथमिया कभी-कभी थोड़े समय के लिए ही दिखाई देती है, इसलिए कुछ मरीजों में लगातार या लंबे समय तक हृदय की धड़कन की निगरानी की जरूरत पड़ सकती है। जाँच रिपोर्ट के बाद ही यह तय किया जाता है कि मरीज को उपचार की आवश्यकता है या केवल निगरानी पर्याप्त है।
हार्ट एरिथमिया का इलाज कैसे किया जाता है
?
एरिथमिया का उपचार उसके प्रकार और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ मरीजों में दवाओं
की मदद से तेज़, धीमी या अनियमित धड़कन को नियंत्रित किया जा सकता है। कुछ मामलों में पेसमेकर जैसे उपकरण
की जरूरत पड़ सकती है। आवश्यकता के अनुसार अन्य प्रक्रियाएं या सर्जरी भी उपचार का हिस्सा हो सकती हैं।
उपचार का मुख्य उद्देश्य हृदय की असामान्य लय को नियंत्रित करना, लक्षणों को कम करना और संभावित जटिलताओं के जोखिम को कम करना होता है।
एरिथमिया से ज़्यादा खतरा किसे होता है
?
एरिथमिया का पता कैसे लगाया जाता है
,
और आमतौर पर कौन से टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है
?
एरिथमिया तब होता है जब दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम की बनावट या काम करने के तरीके में कोई समस्या होती है। जिन लोगों को डायबिटीज, हाइपरटेंशन, डिस्लिपिडेमिया (हाई कोलेस्ट्रॉल), मोटापा या कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ (दिल का दौरा) जैसी बीमारियाँ हैं—या जिनकी कोरोनरी स्टेंटिंग हुई है—उन्हें एरिथमिया होने का खतरा ज़्यादा होता है। एरिथमिया का पता लगाने के लिए मुख्य टेस्ट में ECG, इकोकार्डियोग्राफी और होल्टर मॉनिटरिंग शामिल हैं।
एरिथमिया को समझना क्यों जरूरी है
?
दिल की धड़कन हमारे शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण संकेत है। उसकी लय में कभी-कभार होने वाला सामान्य बदलाव चिंता का विषय नहीं हो सकता, लेकिन बार-बार होने वाली या लक्षणों के साथ आने वाली असामान्य धड़कन की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
समय पर पहचान, सही जाँच और उचित उपचार से कई प्रकार की एरिथमिया को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज को बेहतर जीवन जीने में मदद मिल सकती है।
आप
किसी
ऐसे
व्यक्ति
को
क्या
सलाह
देंगे
जिसे
हाल
ही
में
एरिदमिया
का
पता
चला
है
?
जिस मरीज़ को हाल ही में एरिदमिया का पता चला है, उसे ज़रूरी टेस्ट (जैसे इको या होल्टर टेस्ट) और क्लिनिकल जाँच (जिसमें CHA2DS2-VASc स्कोरिंग शामिल है) करवानी चाहिए। साथ ही, उन्हें बताए गए इलाज के तरीके का पालन करना चाहिए—चाहे उसमें सिर्फ़ दवाएँ लेनी हों या पेसमेकर, AICD या CRT इम्प्लांट जैसे डिवाइस की ज़रूरत हो। ये सभी सुविधाएँ हमारे अस्पताल में उपलब्ध हैं।
अगर आपके पास भी एरिशमिया से जुड़े कोई सवाल हैं, तो अपने नज़दीकी उजाला सिग्नस हॉस्पिटल में ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें, या हमारे विशेषज्ञों से जुड़ने के लिए askadoctor@ujalacygnus.com पर ईमेल करें। डॉ मनदीप सिंह से अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
FAQ
क्या
दिल की धड़कन का तेज़ या असामान्य महसूस होना (
palpitations)
हमेशा दिल की बीमारी का संकेत होता है
,
या यह स्वस्थ लोगों में भी हो सकता है
?
Palpitations का मतलब है दिल की धड़कन का असामान्य या असहज महसूस होना। हालांकि ये एरिथमिया का मुख्य लक्षण हैं, लेकिन ये सामान्य दिल की धड़कन के साथ भी हो सकते हैं—जैसे, जब दिल ज़ोर से सिकुड़ता है या ब्लड प्रेशर ज़्यादा होता है। इसलिए स्वस्थ लोगों में भी कभी-कभी इसकी संभावनाएं दिखती है।
अनियमित दिल की धड़कन को कब मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए
,
और किन लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए
?
अगर अनियमित दिल की धड़कन के साथ सीने में तेज़ दर्द, सांस लेने में तकलीफ़, कम ब्लड प्रेशर या बेहोशी जैसे लक्षण हों, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। हार्ट फेलियर, स्ट्रोक या हार्ट अटैक जैसी जटिलताओं से बचने के लिए अस्पताल जाना चाहिए।
एरिथमिया के लिए कौन से इलाज के विकल्प मौजूद हैं
,
और डॉक्टर सबसे अच्छा तरीका कैसे तय करते हैं
?
एरिथमिया के इलाज में एंटी-एरिथमिक दवाएँ, दिल की धड़कन को कंट्रोल करने के लिए इंजेक्शन, पेसमेकर इम्प्लांट, AICD डिवाइस, CRT डिवाइस आदि शामिल हैं। हर मामले की खास स्थितियों के आधार पर सबसे अच्छा तरीका तय किया जाता है।
क्या
दिल की बीमारी या डायबिटीज वाले लोग एरिथमिया से बच सकते है
?
एंटी-एरिथमिक दवाएँ, रिदम को कंट्रोल करने वाले इंजेक्शन और एंटीकोआगुलंट्स (खून पतला करने वाली दवाएँ) का इस्तेमाल करके एरिदमिया को कंट्रोल किया जा सकता है या इसके गंभीर नतीजों से बचा जा सकता है। पेसमेकर और AICD इम्प्लांट बेहोशी या CHB, VT और VF जैसे गंभीर एरिदमिया को रोक सकते हैं।
दिल की धड़कन को लेकर कब सतर्क होना चाहिए
?
यदि धड़कन बार-बार असामान्य महसूस हो, आराम की स्थिति में भी बहुत तेज़ या बहुत धीमी हो, या इसके साथ चक्कर
,
सांस लेने में परेशानी
,
सीने में दर्द
,
अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी
जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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