
मानसून में डेंगू के कहर से बचकर रहना है जरूरी
By Priyambda Sahay
Reviewed by : Ujala Cygnus
July 31, 2026
मानसून आने के साथ मौसमी डेंगू बुखार का मौसम भी आ चुका है। इस मौसम में बुजुर्ग से लेकर बच्चे तक सभी डेंगू बुखार की चपेट में आसानी से आ जाते हैं। इसलिए जरूरी है कि डेंगू से जुड़े तथ्यों के बारे में विस्तार से जानकारी ली जाए।
यदि कोई व्यक्ति डेंगू से संक्रमित हो जाता है, तो शरीर में लक्षण 3 दिनों से लेकर 14 दिनों तक बने रहता हैं। ध्यान वाली बात यह है कि डेंगू के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर भी होते हैं जो कभी-कभी जानलेवा हो जाते हैं।
अगर बात शरीर में डेंगू की शुरुआत की करें, तो यह तेज बुखार, सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द, थकान, मिचली, उल्टी, त्वचा पर लाल चकत्ते और भूख ना लगने जैसे लक्षणों से होती है।
इस बारे में उजाला सिग्नस अमृतधारा माई हॉस्पिटल के डॉक्टर ने इस बारे में जानकारी दी है।
डेंगू बुखार, जिसे आमतौर पर 'ब्रेकबोन फीवर' (हड्डियों को तोड़ने वाला बुखार) कहा जाता है, मच्छरों से फैलने वाला एक संक्रमण है जो फ्लू जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। यह एडीज मच्छरों से फैलता है और चार अलग-अलग वायरस के कारण होता है।
हालांकि ज़्यादातर DENV संक्रमण हल्के होते हैं, लेकिन DENV फ्लू जैसा गंभीर संक्रमण भी पैदा कर सकता है। कुछ मामलों में, गंभीर डेंगू बुखार जानलेवा हो सकता है।
यह समय डेंगू बुखार के फैलने का पीक टाइम माना जाता है।
डेंगू बुखार क्या है?
डेंगू बुखार मुख्य रूप से डेंगू वायरस (DENV) के संक्रमण के कारण होता है, जो संक्रमित एडीज़ एजिप्टी (Aedes aegypti) मादा मच्छर के काटने से इंसानों में फैलता है। यह वायरस चार अलग-अलग प्रकार (DENV-1, DENV-2, DENV-3, और DENV-4) का होता है।
जब कोई मच्छर, पहले से संक्रमित किसी व्यक्ति को काटता है, तो वायरस मच्छर के शरीर में प्रवेश कर जाता है।
संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो यह वायरस उस स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है। वहीं एक बार जब कोई व्यक्ति डेंगू बुखार से उबर जाता है, तो वायरस से लड़ने में उसका शरीर सक्षम हो जाता है, लेकिन अन्य तीन प्रकार के वायरस से नहीं। यदि आप दूसरी, तीसरी या चौथी बार संक्रमित होते हैं, तो गंभीर डेंगू बुखार, जिसे डेंगू रक्तस्रावी बुखार (Dengue Hemorrhagic Fever) के रूप में भी जाना जाता है, के विकसित होने की
संभावना बढ़ जाती है।डेंगू का इलाज समय पर करना बेहद जरुरी होता है।
डेंगू के लक्षण क्या हैं?
डेंगू आमतौर पर बच्चों को होने वाली बीमारी है, लेकिन बड़ेबुजुर्ग भी इसका शिकार हो जाते हैं। वैसे तो डेंगू के लक्षण भी सामान्य बुखार जैसे ही होते हैं। हालांकि, एडीज मच्छर के काटने के 4 दिनों से लेकर 2 सप्ताह के बीच कभी भी नजर आ सकते हैं-
डेंगू के दौरान रोगी को 40°C / 104°F तापमान वाला तेज बुखार
तेज सिर दर्द
आंख में दर्द
जी मचलना या उल्टी लगना डेंगू के दौरान ग्रंथियों में सूजन हो जाना, जोड़ों, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द होना और त्वचा पर लाल चकत्ते होना
डेंगू के अन्य लक्षण
इसके अलावा डेंगू के गंभीर लक्षणों में मसूड़ों से खून आना, खून की उल्टी लगना, तेज-तेज सांस लेना और शरीर में तेज दर्द/बेचैनी जैसे लक्षण भी डेंगू में देखे जाते हैं।
डेंगू का इलाज क्या है?
यहाँध्यान देने वाली बात यह है कि लोगों को डेंगू वायरस से बचाने के लिये बाजार में कोई वैक्सीन अभी नहीं है। हालांकि, इस वायरस पर नियंत्रण पाने के लिए वैक्सीन तथा दवाओं पर काम चल रहा है। वहीं, डेंगू बुख़ार से लोगों को बचाने के कुछ उपाय हैं, जिन्हें अवश्य किए जाने चाहिए-
डेंगू होने पर अधिक से अधिक आराम करें।
डॉक्टर से सलाह लेकर इलाज करवाएं।
शरीर में पानी की कमी नहीं हो, उसके लिए पानी जितना हो सके पिएं।
तरल पदार्थों का सेवन करते रहें।
साफ, स्वच्छ एवं मच्छरों से बचाव कर सोएं।
डेंगू बुखार का पता कैसे लगाया जाता है?
अगर डेंगू इन्फेक्शन का शक हो, तो वायरस की जांच के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। ब्लड टेस्ट के दौरान आपकी बांह की नस से खून का सैंपल लेने के लिए एक छोटी सुई का इस्तेमाल किया जाता है। फिर सैंपल को लैब में माइक्रोस्कोप के नीचे जांचने और बीमारी की पुष्टि करने के लिए भेजा जाता है।
डेंगू के लक्षण नजर आने या इससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए आप अपने नजदीकी उजाला सिग्नस अस्पताल में अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं।
FAQs
डेंगू बुखार को कैसे पहचानें?
डेंगू की शुरुआती दौर में पहचान मुश्किल है, कुछ लक्षणों के आधार पर हम डेंगू की पहचान कर सकते हैं। दरअसल, जब किसी व्यक्ति को डेंगू हो जाता है, तो उसके शरीर का तापमान चढ़ जाता है यानि बुखार लगने लगता है। बुखार आने के वक्त ठंड लगने लगती है। इसके अलावा, भूख लगनी कम हो जाती है, ब्लडप्रेशर (BP) भी गिरने लगता है और चक्कर आने शुरू हो जाते हैं।
डेंगू में प्लेटलेट्स (Platelets in Dengue) कितनी होती है?
कुछ लोगों को थ्रोम्बोसाइटोपेनिया या डेंगू जैसे बुखार में शरीर की प्लेटलेट्स घट जाती हैं जिसे बढ़ाना बेहद जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक शरीर का प्लेटलेट्स काउंट 1.5 लाख से 4.5 चार लाख तक होना चाहिए।
डेंगू की सबसे गंभीर अवस्था कौन सी है?
यदि कोई मरीज बेहोश हो जाता है या मरीज की नाड़ी कभी तेज और कभी धीरे चलने लगती है। उसका ब्लड प्रेशर लो होने लगता है, तो ये तीनों कंडीशन डेंगू में सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं।
डेंगू के चेतावनी वाले लक्षण क्या हैं?
डेंगू के चेतावनी वाले लक्षणों में शामिल हैं:
पेट में दर्द
लगातार उल्टी होना
शरीर में तरल पदार्थ (फ्लूइड) का जमा होना
म्यूकोसल ब्लीडिंग (नाक, मसूड़ों आदि से खून आना)
बेचैनी
लिवर का आकार बढ़ना (> 2 cm)
HCT का बढ़ना, साथ ही प्लेटलेट काउंट में तेज़ी से कमी आना
डेंगू बुखार का सबसे अच्छा इलाज क्या है?
डेंगू बुखार का कोई खास इलाज नहीं है। अगर आपको डेंगू बुखार का शक है, तो एसिटामिनोफेन (acetaminophen) वाली दर्द निवारक दवाएं लें और एस्पिरिन (aspirin) वाली दवाओं से बचें, क्योंकि इनसे ब्लीडिंग बढ़ सकती है। आपको भरपूर आराम करना चाहिए, खूब पानी पीना चाहिए और अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
डेंगू बुखार के तीन चरण कौन से हैं?
5-7 दिनों के आम इनक्यूबेशन पीरियड (बीमारी के लक्षण दिखने से पहले का समय) के बाद डेंगू बुखार होता है, और बीमारी तीन चरणों से गुजरती है:
फेब्राइल (बुखार वाला चरण),
क्रिटिकल (गंभीर चरण),
और कॉन्वलेसेंट (ठीक होने का चरण)।
बुखार आमतौर पर दो चरणों (biphasic) में आता है और 2-7 दिनों तक रहता है।
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