सर्वाइकल कैंसर:भारत में एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली बीमारी

सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) दुनिया की सबसे अधिक रोकी जा सकने और इलाज योग्य कैंसरों में से एक है, लेकिन भारत में यह आज भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामले और इससे होने वाली मृत्यु कई अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक है। HPV-Related Cancers Factsheet 2023 के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 1,23,907 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता चलता है, और लगभग 77,348 महिलाओं की मृत्यु इस बीमारी के कारण हो जाती है। यह भारत में स्तन कैंसर के बाद महिलाओं में पाया जाने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। ये आंकड़े इसलिए और भी चिंताजनक हैं क्योंकि सर्वाइकल कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है।

इससे जुड़े मामलों की संख्या लाखों में होने के बावजूद भारत में अभी तक कोई राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी स्क्रीनिंग कार्यक्रम नहीं है, जिससे समय पर सर्वाइकल कैंसर की पहचान और इलाज होना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण: HPV संक्रमणसर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) है। यह बहुत ही सामान्य वायरस है, जो मुख्य रूप से यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है।

शोध से पता चलता है कि लगभग 99% सर्वाइकल कैंसर के मामले HPV संक्रमण से जुड़े होते हैं।HPV की भूमिकामेडिकल प्रमाण बताते हैं कि यदि HPV संक्रमण की समय पर पहचान और रोकथामकी जाए, तो सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को 90% तक कम किया जा सकता है। इससे स्पष्ट है कि कैंसर के मामले में स्क्रीनिंग और वैक्सीनेशन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग गाइडलाइंस: महिलाओं को क्या जानना चाहिएनियमित जांच (स्क्रीनिंग) सर्वाइकल कैंसर को शुरुआती अवस्था में पहचानने का सबसे प्रभावी तरीका है।Indian Cancer Society, Bengaluru और USPSTF के अनुसार:21 से 29 वर्ष की महिलाओं को हर 3 साल में एक बार Pap टेस्टकराना चाहिए30 से 65 वर्ष की महिलाओं को हर 5 साल में Pap टेस्ट और HPV टेस्ट दोनोंकराना चाहिएAmerican Cancer Society के अनुसार, 65 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं, यदि पहले नियमित जांच में रिपोर्ट सामान्य रही हो, तो स्क्रीनिंग बंद कर सकती हैं।आगे का रास्ता: जागरूकता, जांच और रोकथामसर्वाइकल कैंसर जानलेवा हो, यह जरूरी नहीं है।

समय पर जांच, HPV वैक्सीनेशन और जागरूकताके जरिए इसके अधिकांश मामलों को रोका या सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता हैमहिलाओं को सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों, जोखिम कारकों और बचाव के उपायोंके बारे में जागरूक करना और स्क्रीनिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाना, भारत में इस बीमारी के बोझ को कम करने के लिए बेहद जरूरी है।डॉ. सुधेंदु शेखर (डायरेक्टर – ऑन्कोलॉजी विभाग)और डॉ. संदीप तिवारी (कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी), उजाला सिग्नस लक्ष्मी हॉस्पिटल, वाराणसी ने सर्वाइकल कैंसर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दिए हैं:

सर्वाइकल कैंसर क्या है और इसके कितने प्रकार हैं?

सर्वाइकल कैंसर वह कैंसर है जिसमें गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं। मुख्य रूप से इसका सबसे आम प्रकार स्क्वैमस सेल कार्सिनोमाहोता है। इसके अलावा कुछ अन्य प्रकार भी हैं जैसे:एडेनोकार्सिनोमाएडेनोस्क्वैमस कार्सिनोमा स्मॉल सेल कैंसर

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण क्या हैं? डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

सर्वाइकल कैंसर के सामान्य लक्षण:

पीरियड्स के बीच रक्तस्राव

यौन संबंध के बाद रक्तस्राव

मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग

पेल्विक दर्द

सफेद या बदबूदार योनि स्राव

यदि ये लक्षण लगातार बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। इसके अलावा पेशाब से जुड़ी कोई भी समस्या जैसे दर्द, जलन या दिक्कत होने पर भी मेडिकल जांच जरूरी है। समय पर डॉक्टर से मिलने से बीमारी का जल्दी पता लगाया जा सकता है।

क्या भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं?

भारत में सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामले देर से पहचान में आते हैं, जिसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी है। बहुत सी महिलाएं शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेतीं। सामाजिक झिझक और शर्म के कारण कई बार महिलाएं अपने लक्षण छिपा लेती हैं, जिससे इलाज में देरी होती है। इसी वजह से मरीज अक्सर गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे इलाज कठिन हो जाता है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि जागरुकता के अभाव में भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के उपाय क्या हैं?

सर्वाइकल कैंसर उन कैंसरों में से एक है जिन्हें काफी हद तक रोका जा सकता है। इसका मुख्य कारण HPV संक्रमण है। इससे बचाव के लिए जरूरी हैः साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखना HPV वैक्सीन लगवाना नियमित स्क्रीनिंग कराना यदि हम शुरुआती स्तर पर HPV संक्रमण को रोक लें, तो लगभग  90% सर्वाइकल कैंसर से बचाव संभव है ।

क्या HPV वैक्सीन प्रभावी है?

हाँ, बिल्कुल। HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचाव का एक बेहद महत्वपूर्ण तरीका है।भारत में दो प्रकार की वैक्सीन उपलब्ध हैं:बाइवैलेंट– दो प्रकार के वायरस से सुरक्षा क्वाड्रिवैलेंट– चार प्रकार के वायरस से सुरक्षा अब भारत में बनी वैक्सीन भी उपलब्ध है।

वैक्सीन के लिए सही उम्र:

9–14 साल: 2 डोज

15–26 साल: 3 डोज

यह वैक्सीन लड़कियों और लड़कों दोनों के लिए जरूरी है, ताकि भविष्य में संक्रमण फैलने से रोका जा सके।

क्या सर्वाइकल कैंसर से प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है ?

सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से को प्रभावित करता है, जिससे प्रजनन क्षमता पर असर पड़ सकता है। शुरुआती अवस्था में इलाज होने पर गर्भाशय को बचाया जा सकता है और महिला मां बन सकती है। लेकिन अगर बीमारी एडवांस स्टेज में हो, तो प्रजनन क्षमता पर गंभीर असर पड़ता है।

यदि आपके मन में भी सर्वाइकल कैंसर से जुड़े कोई सवाल हैं, तो अपने नजदीकी

उजाला सिग्नस अस्पतालसे संपर्क करें या हमारे विशेषज्ञों से ईमेल के माध्यम से पूछें: askadoctor@ujalacygnus.com

FAQ

क्या सर्वाइकल कैंसर का इलाज संभव है?

हाँ, यदि शुरुआती अवस्था में पहचान हो जाए तो सर्वाइकल कैंसर पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।

भारत में सर्वाइकल कैंसर सबसे ज्यादा कहाँ पाया जाता है?

अरुणाचल प्रदेश के पापुमपारे जिले में सर्वाइकल कैंसर की दर सबसे अधिक (27.7) पाई गई है।

दुनिया भर में कितनी महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर होता है?

2022 में लगभग 6.6 लाख महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से प्रभावित हुईं और 3.5 लाख महिलाओं की मृत्यु हुई।

HPV संक्रमण से कैंसर होने का खतरा किन वजहों से बढ़ता है?

कमजोर इम्यून सिस्टम, धूम्रपान, मोटापा और प्रजनन संबंधी कारक इसके मुख्य जोखिम हैं।

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