बदलती जीवनशैली, बदलते हॉर्मोन: महिलाओं में PCOS क्यों बढ़ रहा है?

हाल के वर्षों में, जीवनशैली में आए बदलावों का महिलाओं की सेहत पर काफ़ी गंभीर असर पड़ा है। पहले, ज़्यादातर लड़कियों में पीरियड्स की शुरुआत 13 से 19 साल की उम्र के बीच होती थी। मिलेनियल पीढ़ी के बाद वाली पीढ़ी में, पीरियड्स की शुरुआत आम तौर पर 10 से 16 साल की उम्र के बीच देखी जाती थी। हालाँकि, अब एक चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसमें कुछ लड़कियाँ, जिनकी उम्र महज़ सात साल है, इस अवस्था में प्रवेश कर रही हैं। इसी तरह, रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) के पैटर्न में भी बदलाव देखे जा रहे हैं, जिसमें कुछ महिलाओं को 30 की उम्र में ही रजोनिवृत्ति का अनुभव हो रहा है। ये रुझान बायोलॉजिकल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में बढ़ते असंतुलन की ओर इशारा करते हैं।

भारत में PCOS और PCOD के मामले बढ़ रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि देश में हर पाँच में से लगभग एक महिला PCOS से प्रभावित है। हालाँकि ये स्थितियाँ दुनिया भर में आम हैं, लेकिन अक्सर इन पर खुलकर चर्चा नहीं की जाती, जिससे जागरूकता और शिक्षा और भी ज़्यादा ज़रूरी हो जाती है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) एक हार्मोनल विकार है जिसके कारण अंडाशय (ओवरी) में कई सिस्ट (गांठें) बन जाती हैं। ये सिस्ट दोनों अंडाशयों को प्रभावित करते हैं और उन्हें बड़ा (bulky) बना देते हैं। ये सिस्ट आकार में बड़े होते हैं और अपरिपक्व अंडों तथा अन्य स्रावों से बने होते हैं। अंडाशयों की इस गड़बड़ी का असर महिला के पीरियड्स चक्र पर भी पड़ता है और यह अंडाशयों के सामान्य कामकाज में भी बाधा डालता है।

आगरा के उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ (Obstetrics and Gynaecology) डॉ. मनप्रीत शर्मा, PCOS के बारे में अहम जानकारी साझा कर रही हैं, जिसमें इसके कारण, लक्षण और प्रबंधन शामिल हैं। ताकि महिलाओं को इस स्थिति को बेहतर ढंग से समझने और उससे निपटने में मदद मिल सके।

आजकल कम उम्र की महिलाओं में PCOS के मामले (diagnosis) तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह स्थिति इतनी आम क्यों होती जा रही है, और महिलाओं को इसके बारे में क्या समझना चाहिए?

PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) जीवनशैली में बदलाव, बढ़ते तनाव, खान-पान की अस्वस्थ आदतों, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ते मोटापे के स्तर के कारण ज़्यादा आम होता जा रहा है। हालांकि, बेहतर जागरूकता और निदान के उन्नत तरीकों ने भी ज़्यादा मामलों की पहचान करने में योगदान दिया है।

महिलाओं को यह समझना चाहिए कि PCOS एक हार्मोनल विकार है, न कि केवल प्रजनन से जुड़ी कोई समस्या; और इसका शुरुआती निदान (early diagnosis) तथा उचित प्रबंधन लंबे समय तक रहने वाली जटिलताओं को रोकने में मदद कर सकता है।

PCOS किसी महिला के हार्मोनल संतुलन और समग्र प्रजनन स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है ?

PCOS के कारण हार्मोन में असंतुलन पैदा होता है, विशेष रूप से पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) का स्तर बढ़ जाता है। इससे ओव्यूलेशन (अंडाशय से अंडा निकलने की प्रक्रिया) में बाधा आ सकती है, जिसके परिणामस्वरूप मासिक धर्म अनियमित हो जाता है या पूरी तरह से बंद हो जाता है। इसके कारण मुँहासे, शरीर पर अत्यधिक बालों का उगना और बालों का पतला होना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा ओव्यूलेशन पर असर पड़ता है, इसलिए गर्भधारण करना ज़्यादा मुश्किल हो सकता है और यह पूरी प्रजनन सेहत पर भी असर डाल सकता है।

क्या PCOS से डायबिटीज़,मोटापा या दिल की बीमारी जैसी दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है?

हाँ, PCOS का इंसुलिन रेजिस्टेंस से गहरा संबंध है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज़ होने का खतरा बढ़ जाता है। PCOS वाली महिलाओं में वज़न बढ़ने और मोटापे की संभावना भी ज़्यादा होती है। कुल मिलाकर, इससे दिल की बीमारियों, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के असंतुलन का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, लंबे समय तक निगरानी और जीवनशैली का सही प्रबंधन बहुत ज़रूरी है।

क्या PCOS वाली महिलाएँ स्वाभाविक रूप से गर्भधारण कर सकती हैं? और जिन महिलाओं को गर्भधारण में दिक्कत आ रही है, उनके लिए कौन-से इलाज के विकल्प उपलब्ध हैं?

PCOS वाली कई महिलाएँ स्वाभाविक रूप से गर्भधारण कर सकती हैं, खासकर अगर वे अपनी जीवनशैली का सही प्रबंधन करें और डॉक्टरों की सलाह मानें। जिन महिलाओं को गर्भधारण में दिक्कत आ रही है, उनके लिए इलाज के विकल्पों में ओव्यूलेशन को बढ़ावा देने वाली दवाएँ, हार्मोनल थेरेपी और ज़रूरत पड़ने पर IVF जैसी ‘असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीकें’ शामिल हैं। किसी विशेषज्ञ से जल्द सलाह लेने से सफल गर्भधारण की संभावनाएँ काफी बढ़ जाती हैं।

PCOS को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में खान-पान,व्यायाम और जीवनशैली में बदलाव की क्या भूमिका है ?

PCOS के प्रबंधन में जीवनशैली में बदलाव की बहुत अहम भूमिका होती है। फाइबर और प्रोटीन से भरपूर, तथा कम चीनी वाला संतुलित आहार इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करता है; नियमित व्यायाम नींद को बेहतर बनाने में मदद करता है और हार्मोनल संतुलन को सुधारता है। तनाव से बचना, पूरी नींद लेना और एक ही जगह बैठे रहने वाली आदतों से दूर रहना भी उतना ही ज़रूरी है। कई मामलों में, सिर्फ़ जीवनशैली में बदलाव करके ही लक्षणों में काफी सुधार किया जा सकता है।

PCOS के बारे में ऐसी कौन-सी भ्रांतियाँ या गलतफहमियाँ हैं, जिनके बारे में महिलाओं को पता होना चाहिए ?

एक गलतफहमी यह है कि PCOS वाली महिलाएँ कभी गर्भवती नहीं हो सकतीं, जो कि सच नहीं है। दूसरी गलतफहमी यह है कि सिर्फ़ ज़्यादा वज़न वाली महिलाओं को ही यह समस्या होती है, जो कि सच नहीं है। PCOS किसी भी तरह के शरीर वाली महिला को हो सकता है। कुछ लोग इसे एक अस्थायी समस्या मानते हैं, लेकिन इसके लिए लंबे समय तक प्रबंधन की ज़रूरत होती है। PCOS को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए जागरूकता और सही जानकारी होना बहुत ज़रूरी है।

अगर आपके मन में PCOS से जुड़े कोई खास सवाल हैं, तो कृपया अपने नज़दीकी उजाला सिग्नस हॉस्पिटल से संपर्क करें, या हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञों से askadoctor@ujalacygnus.com पर संपर्क करें। आप डॉ. मनप्रीत शर्मा से अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए यहाँ क्लिक भी कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

PCOS क्या है?

PCOS एक ऐसा सिंड्रोम है जिसमें आपकी ओवरीज़ (अंडाशय) कई सिस्ट (गाँठों) से भर जाती हैं। ये सिस्ट दोनों ओवरीज़ पर असर डालती हैं और उन्हें सामान्य से ज़्यादा बड़ा (bulky) बना देती हैं। ये सिस्ट आकार में बड़ी होती हैं और इनमें अपरिपक्व अंडे तथा अन्य स्राव भरे होते हैं। ओवरीज़ के ठीक से काम न करने की वजह से आपका मासिक चक्र (menstrual cycle) प्रभावित होता है। कई बार, आपके पीरियड्स देर से आते हैं। दुर्भाग्य से, कुछ महिलाओं को तो मासिक चक्र बिल्कुल भी नहीं आता है। PCOS का निदान किशोरों में इसकी शुरुआत के समय किया जा सकता है।

PCOS के क्या कारण हैं?

PCOS के कारण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। हालाँकि, आपके जीन्स इन स्थितियों के विकसित होने के लिए ज़िम्मेदार हो सकते हैं। यह देखा गया है कि PCOD/PCOS से प्रभावित महिलाओं में इन स्थितियों का पारिवारिक इतिहास होता है।

PCOS के क्या लक्षण हैं?

PCOS के लक्षणों में मोटापा, अनियमित मासिक धर्म, बिल्कुल भी मासिक धर्म न होना, चेहरे पर बालों का बढ़ना, गंजापन, आपकी गर्दन के पिछले हिस्से या कोहनी पर धब्बे, शरीर से दुर्गंध, थकान, नींद से जुड़ी समस्याएँ, डिप्रेशन, मूड में बदलाव, सिरदर्द, एंग्जायटी, कांख के बाल शामिल हैं।

PCOS से किस तरह के जोखिम जुड़े हैं?

PCOS से जुड़े जोखिमों में बांझपन, डायबिटीज़, हृदय रोग, डिप्रेशन, एंडोमेट्रियल कैंसर आदि शामिल हैं।

हम PCOS का इलाज कैसे कर सकते हैं?

PCOS का कोई सटीक इलाज नहीं है, और इसके लक्षणों को अकेले नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। हालाँकि, उपचार के विकल्प इसके लक्षणों को नियंत्रित कर सकते हैं और इसके दुष्प्रभावों तथा जटिलताओं को रोक सकते हैं। आपके अनियंत्रित हार्मोन्स को नियंत्रित करने के कई विकल्प हैं, और इनमें आहार, व्यायाम, जीवनशैली में बदलाव और शरीर का वज़न बनाए रखना शामिल है।

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