किडनी स्टोन को न करें नजरअंदाज, दर्द से पहले पहचानें इसके चेतावनी संकेत

गुर्दे की पथरी यानी किडनी स्टोन सभी आयु वर्ग के लोगों में आजकल

आम समस्या बनती जा रही है, जो युवाओं और बुजुर्ग दोनों को प्रभावित करती है। जीवनशैली में बदलाव, कम पानी पीना, खान-पान से जुड़ी आदतें, बढ़ता तापमान और मेटाबोलिक डिसऑर्डर से हाल के वर्षों में किडनी स्टोन के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है।

हालांकि कई लोग किडनी स्टोन को तेज दर्द से जोड़ते हैं, लेकिन हर स्टोन के लक्षण तुरंत नहीं दिखते। ये कुछ महीनों तक ठीक रहते और फिर यूरिन में रुकावट, इन्फेक्शन या किडनी डैमेज जैसी गंभीर दिक्कतें पैदा कर देते हैं। इसलिए जागरूकता, समय पर डायग्नोसिस और सही इलाज ज़रूरी है।

उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल, आगरा के यूरोलॉजिस्ट डॉ. लक्ष्मीकांत शर्मा के अनुसार, “किडनी स्टोन की समस्या आसानी से ठीक हो सकती है। यूरोलॉजिकल केयर में हुई तरक्की ने इलाज को पहले से ज़्यादा सुरक्षित, कम चीड़-फाड़ वाला और असरदार बना दिया है। लेकिन इस बीमारी के लक्षणों को जल्दी पहचानना, समय पर मेडिकल सलाह लेना और दोबारा होने से रोकने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना यानी अच्छी तरह हाइड्रेटेड रहना, संतुलित भोजन लेना और नियमित हेल्थ चेक-अप करवाना आपकी किडनी को बचाने में बहुत मदद कर सकते हैं।”

डॉ. लक्ष्मीकांत शर्मा ने यहाँ किडनी स्टोन के बारे में ज़रूरी सवालों के जवाब दिये हैं और लक्षणों को पहचानने, कारणों को समझने और बचाव के सही उपाय करने के बारे में कीमती जानकारी भी सांझा की है।

किडनी स्टोन क्या हैं ?

और ये कैसे बनते हैं

किडनी स्टोन, जिन्हें रीनल कैलकुली भी कहा जाता है, मिनरल और सॉल्ट से बने हार्ड डिपॉजिट होते हैं जो किडनी के अंदर क्रिस्टलाइज़ हो जाते हैं। ये साइज़ में अलग-अलग होते हैं—छोटे, रेत जैसे कणों से लेकर बड़े स्टोन तक होते हैं। छोटे स्टोन ज्यादातर प्राकृतिक रूप से ही निकल जाते हैं, बड़े स्टोन को बाहर निकालने के लिए मेडिकल मदद की ज़रूरत होती है।
किडनी स्टोन के सबसे आम टाइप में शामिल हैं:
कैल्शियम स्टोन (सबसे आम)
यूरिक एसिड स्टोन
स्ट्रुवाइट स्टोन
सिस्टीन स्टोन
किडनी में स्टोन होने के पीछेअलग-अलग कारण होते हैं, इसलिए दोबारा होने से रोकने के लिए सही जांच ज़रूरी है। कभी-कभी, छोटे स्टोन बिना ज़्यादा दर्द के पेशाब के ज़रिए शरीर से निकल जाते हैं। लेकिन जो स्टोन नहीं निकलते, वे किडनी, यूरेटर, ब्लैडर या पेशाब के रास्ते में दर्द पैदा कर सकते हैं। इसी वजह से कई लोगों को भयंकर दर्द का सामना भी करना पड़ता है।

किडनी स्टोन के आम लक्षण क्या हैं ?

किडनी स्टोन के खास लक्षणों में से एक है पीठ या साइड में अचानक, तेज़ दर्द होना जो पेट के निचले हिस्से या कमर की तरफ बढ़ सकता है। दर्द लहरों की तरह आ सकता है और इसके साथ यूरिन करते समय जलन, यूरिन में खून आना, बार-बार यूरिन आना, जी मिचलाना, उल्टी, बुखार और ठंड लगना (अगर इन्फेक्शन हो) और यूरिन करने में दिक्कत हो सकती है। किडनी में छोटे स्टोन होने पर लक्षण ज्यादा नहीं दिखते हैं। लेकिन रेगुलर हेल्थ चेक-अप के दौरान इसका पता किया जा सकता है।

क्या किडनी स्टोन का इलाज न करने पर किडनी को नुकसान हो सकता है ?

किडनी स्टोन के लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने के गंभीर नतीजे हो सकते हैं। यूरिनरी ट्रैक्ट को ब्लॉक करने वाले स्टोन से किडनी में सूजन, बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, तेज़ दर्द और लंबे समय तक रहने पर किडनी का काम करना हमेशा के लिए बंद हो सकता है।
अच्छी बात यह है कि मॉडर्न डायग्नोस्टिक टूल से पहले से कहीं ज़्यादा आसानी से पता चल जाता है। जांच में ये शामिल हो सकते हैं:
किडनी और यूरिनरी ट्रैक्ट का अल्ट्रासाउंड
CT स्कैन (खासकर छोटी या कॉम्प्लेक्स पथरी के लिए)
यूरिन की जांच
किडनी के काम का पता लगाने और मेटाबोलिक असामान्यताओं की पहचान करने के लिए ब्लड टेस्ट
जांच के जरिए बीमारी का जल्दी पता चलने पर कॉम्प्लीकेशंस बढ़ने से पहले इलाज करना संभव हो जाता है।

मिनिमल इनवेसिव तकनीकों के जरिए किडनी स्टोन का इलाज कैसे होता है ?

इसका इलाज पथरी के साइज़, जगह और मरीज़ की पूरी सेहत पर निर्भर करता है। छोटी पथरी मेडिकल देखरेख में ज़रूरी लिक्विड और दवाओं से अपने आप निकल सकती है। बड़े या रुकावट वाले पत्थरों के लिए इन प्रोसीजर की ज़रूरत हो सकती है-
एक्स्ट्राकॉर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (ESWL): इसमें शॉक वेव का इस्तेमाल करके पत्थरों को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है जो नैचुरली निकल जाते हैं।
यूरेटेरोस्कोपी (URS): लेज़र टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके पत्थरों को निकालने या टुकड़ों में करने के लिए यूरिनरी पैसेज से एक पतला टेलिस्कोप डाला जाता है।
रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी (RIRS): एक फ्लेक्सिबल स्कोप यूरिनरी ट्रैक्ट के ज़रिए किडनी तक पहुँचता है, जिससे बिना बाहरी चीरे के सटीक लेज़र ट्रीटमेंट हो पाता है।
परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (PCNL): बड़े या कॉम्प्लेक्स किडनी स्टोन के लिए पीठ में एक छोटा चीरा लगाकर उपचार किया जाता है।
ये मिनिमली इनवेसिव तकनीकें तेज़ी से रिकवरी, कम दर्द, कम हॉस्पिटल में रहने का समय और बेहतरीन सक्सेस रेट देती हैं।

किडनी स्टोन होने को कैसे रोका जा सकता है ?

अच्छी खबर यह है कि कई किडनी स्टोन को होने से रोका जा सकता है। लाइफस्टाइल में आसान बदलाव से इसके जोखिम काफी कम हो जाते हैं। रोज़ाना 2.5–3 लीटर पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी होने से बचाव करें। नमक कम खाएं, संतुलित भोजन करें और फलों व सब्ज़ियों से भरपूर डाइट लें। प्रोसेस्ड फ़ूड और मीठे ड्रिंक्स का ज़्यादा इस्तेमाल न करें। शरीर का वजन ज्यादा नहीं बढ़ने दे, इसे संतुलित रखें। अक्सर मरीजों को एनिमल प्रोटीन कम मात्रा में सेवन करने की सलाह दी जाती है। अगर बार-बार यूरिनरी इन्फेक्शन हो रहा हो तो डॉक्टर से संपर्क करें और आपको बार-बार पथरी (stone) बनती है, तो मेटाबोलिक जांच जरूर करवाएं। जिन लोगों को एक बार किडनी की पथरी हो चुकी है, उन्हें दोबारा पथरी होने का खतरा ज़्यादा होता है, इसलिए बचाव के उपाय करना बहुत ज़रूरी है।

यूरोलॉजिस्ट (urologist)से मिलने कब जाना चाहिए?

अगर आपको ये लक्षण दिखें तो तुरंत यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें:
पीठ या कमर के एक तरफ़ तेज़ दर्द
पेशाब में खून आना
बुखार के साथ पेशाब से जुड़ी समस्याएं
पेशाब करने में कठिनाई
बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होना
दवा लेने के बाद भी लगातार दर्द बने रहना
समय पर जांच करवाने से जटिलताओं (complications) को रोका जा सकता है और किडनी की कार्यक्षमता को बनाए रखा जा सकता है।

अगर आपके मन में किडनी स्टोन (गुर्दे में पथरी) से जुड़े कोई सवाल हैं, तो कृपया अपने नज़दीकी उजाला सिग्नस अस्पताल ( से संपर्क करें। आप हमारे हेल्थ एक्सपर्ट्स से askadoctor@ujalacygnus.com पर संपर्क कर सकते हैं या डॉ. लक्ष्मीकांत शर्मा से अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं।

FAQs

क्या पर्याप्त पानी पीने के बावजूद किडनी की पथरी हो सकती है?

हाँ, पर्याप्त पानी पीने से जोखिम काफी कम हो जाता है, लेकिन यह किडनी की पथरी को पूरी तरह से नहीं रोकता है। जेनेटिक्स, पारिवारिक इतिहास, ज़्यादा नमक या एनिमल-प्रोटीन का सेवन, कुछ मेडिकल स्थितियां, दवाएं भी पथरी बनने का कारण बन सकती हैं।

क्या किडनी की पथरी के अपने आप निकलने का इंतज़ार करना सुरक्षित है?

यह पथरी के आकार, उसकी जगह और मरीज़ के लक्षणों व सामान्य स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। बहुत छोटी पथरी प्राकृतिक रूप से निकल सकती है, लेकिन अगर पथरी के कारण लगातार दर्द, पेशाब में रुकावट, इन्फेक्शन या किडनी की कार्यक्षमता में कमी हो रही है, तो तुरंत मेडिकल जांच की ज़रूरत होती है। बिना डॉक्टरी सलाह के इंतज़ार करने से कभी-कभी जटिलताएं हो सकती हैं।

क्या इलाज के बाद किडनी की पथरी दोबारा हो सकती है?

हाँ, किडनी की पथरी को हटाने से हमेशा वे कारण खत्म नहीं होते जिनकी वजह से वह बनी थी। जिन लोगों को पहले पथरी हो चुकी है, उन्हें दोबारा पथरी हो सकती है। पथरी के प्रकार की पहचान करना और ज़रूरत पड़ने पर मेटाबोलिक जांच करवाना, दोबारा पथरी होने के जोखिम को कम करने के उपाय तय करने में मदद कर सकता है।

क्या नींबू पानी पीने से किडनी की पथरी को रोकने में मदद मिलती है?

नींबू और अन्य खट्टे फलों (citrus fruits) में साइट्रेट होता है, जो कुछ प्रकार की किडनी की पथरी बनने से रोकने में मदद कर सकता है। हालाँकि, नींबू पानी को पहले से मौजूद पथरी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए, और चीनी वाले खट्टे फलों के ड्रिंक्स का ज़्यादा सेवन नहीं करना चाहिए। जिन लोगों को बार-बार पथरी होती है, उन्हें अपने डॉक्टर से खान-पान में बदलाव के बारे में बात करनी चाहिए।

क्या किडनी की पथरी पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकती है?

किडनी की पथरी पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित कर सकती है, हालाँकि उम्र, जीवनशैली, मेटाबोलिक स्थितियों, खान-पान और अन्य कारकों के आधार पर जोखिम अलग-अलग हो सकता है। लक्षण और जटिलताएँ हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए लगातार पेशाब से जुड़ी समस्याओं को बिना सही जाँच के सिर्फ़ पथरी मान लेने के बजाय, डॉक्टर से जाँच करवानी चाहिए।

क्या बच्चों और किशोरों को किडनी की पथरी हो सकती है?

हालाँकि किडनी की पथरी वयस्कों में ज़्यादा आम है, लेकिन बच्चों और किशोरों को भी यह हो सकती है। डिहाइड्रेशन, खान-पान की आदतें, पारिवारिक इतिहास, मेटाबोलिक विकार और कुछ खास मेडिकल स्थितियाँ इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं। अगर किसी बच्चे को बार-बार पथरी हो रही है, तो इसकी असल वजह का पता लगाने के लिए सावधानीपूर्वक जाँच करवानी चाहिए।

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