बार-बार थकान, वजन बढ़ना या बाल झड़ना—क्या यह सिर्फ तनाव है या थायरॉइड?

क्या आपको पता है कि देश में थायरॉइड के मरीजों की संख्या करोड़ों में हैं। लेकिन इनमें से अधिकांश मरीजों को पता नहीं होता है कि वे इसके शिकार हो चुके हैं। यह बीमारी आपके शरीर में चुपचाप विकसित होती है। इसके लक्षण अक्सर मरीजों को गुमराह कर देते हैं। आलस आना, नींद कम आना, घबराहट होना, बिना वजह थकान, वजन घटना- बढ़ना, ज्यादा गर्म या ठंड महसूस होना, बालों का झड़ना, मूड स्विंग जैसे कारण थायरॉइड की वजह से भी हो सकते हैं। अक्सर लोग इसे तनाव या उम्र संबंधी समस्या समझकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन ऐसी समस्याओं को बार-बार नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।

उजाला सिग्नस जेके मेडिसिटी हॉस्पिटल, जम्मू के जनरल फीजिशियन डॉ. ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है।

क्या होता है थायरॉइड

थायरॉइड आपके गर्दन में स्थित तितली के आकार की एक ग्रंथि होती है जो शरीर के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है। यह प्रतिदिन शरीर के कई आवश्यक कार्यों को नियंत्रित करती है। यह आपके मेटाबोलिज्म को नियंत्रण में रखती है। इसका काम शरीर के वजन, उर्जा और मूड को भी नियंत्रित रखना होता है। यह सबकुछ इसी छोटी सी ग्लैंड पर निर्भर है।

थायरॉइड के प्रकार

थायरॉइड ग्रंथि दो प्रकार के होते हैं-

थायरॉइड ग्रंथि की अतिसक्रियता (Hyperthyrodism)

थायरॉइड ग्रंथि की अतिसक्रियता के कारण T4 और T3 हार्मोन का आवश्यकता से अधिक उत्पादन होने लगता है। जब इन हार्मोन्स का उत्पादन अधिक मात्रा में होने लगता है तो शरीर ऊर्जा का उपयोग अधिक मात्रा में करने लगता है। इसे ही हाइपरथायरायडिज्म कहते हैं। पुरुषों की तुलना महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है।

थायरॉइड हार्मोन की अधिकता के कारण शरीर में मेटाबोलिज्म बढ़ जाता है। इसके अलावा घबराहट, चिड़चिड़ापन, अधिक पसीना आना, हाथों का काँपना, बालों का पतला होना और झड़ना, अनिद्रा (नींद नहीं आने की समस्या), मांसपेशियों में कमजोरी एवं दर्द रहना, दिल की धड़कन बढ़ना, वजन घटना पीरियड्स में अनियमितता, ओस्टियोपोरोसिस होने का खतरा, जिसकी वजह से हड्डी में कैल्शियम तेजी से खत्म होता है।

अल्पसक्रियता (Hypothyrodism)

थायराइड की अल्प सक्रियता के कारण हाइपोथायरायडिज्म हो जाता है। इसकी पहचान इन परेशानियों से की जा सकती है- धड़कन की धीमी गति, हमेशा थकान बना रहना, अवसाद (Depression), ठंड अधिक लगना, मेटाबोलिज्म धीमा पड़ने के कारण वजन बढ़ना, नाखूनों का पतला होना एवं टूटना, पसीने में कमी, त्वचा में सूखापन आना और खुजली होना, जोड़ों में दर्द और मांसपेशियों में अकड़ना होना, बालों का अधिक झड़ना, कब्ज, आँखों में सूजन, बार-बार भूलना, कन्फ्यूज रहना, सोचने-समझने में असमर्थ होना, पीरियड्स में अनियमितता,

चेहरे और आँखों में सूजन, खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाना, महिलाओं में इसके कारण बांझपन आ सकता है।

थायरॉइड ग्रंथि ठीक से काम करना क्यों बंद कर देता है ?

खाने में आयोडिन की मात्रा कम होना, बहुत ज्यादा तनाव हो या फिर परिवार में पहले से ही किसी को थायरॉइड की बीमारी हो या कभी-कभी आपके शरीर का इम्युन सिस्टम ही थायरॉइड ग्लैंड को अटैक कर देता है। महिलाओं में यह समस्या पुरूषों के मुकाबले ज्यादा होती है, खासकर माँ बनने के बाद महिलाओं में यह समस्या ज्यादा होने लगती है। दरअसल हार्मोनल और ऑटोइम्यून कारकों के कारण महिलाएं विशेष रूप से अधिक संवेदनशील होती हैं। इसलिए थायराइड के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कैसे जाने अपने थायरॉइड हेल्थ के बारे में

एक छोटे से ब्लड टेस्ट, टीएसएच (थायरॉइड स्टिम्युलेटिंग हार्मोन) से थायरॉइड के स्तर की जानकारी हो सकती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अन्य थायरॉइड प्रोफाइल टेस्ट भी सलाह दे सकते हैं। अगर प्रारंभिक स्तर पर इसकी जानकारी मरीज को होती है तो इसका उपचार आसान और प्रभावी बन सकता है। जागरूकता और समय पर जांच बेहतर थायरॉइड स्वास्थ्य की दिशा में पहला कदम है।

जागरूकता और समय पर जांच है सबसे जरूरी

कई लोग थायरॉइड के लक्षणों को केवल तनाव, व्यस्त जीवनशैली या बढ़ती उम्र का असर मानकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

समय पर जांच, सही खानपान, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह से थायरॉइड को प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

यदि आपको भी लंबे समय से थकान, वजन में बदलाव या अन्य हार्मोनल समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें। सही समय पर पहचान बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में पहला कदम है।

अगर थायरॉइड से जुड़े सवाल आपके पास भी है तो नजदीकी उजाला सिग्नस अस्पताल से संपर्क करें। आप हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञों से askadoctor@ujalacygnus.com पर भी संपर्क कर सकते हैं या डॉ. के साथ अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए यहाँ क्लिक करें।

FAQ

महिलाओं में थायरॉइड संबंधी विकार अधिक क्यों होते हैं?

हार्मोनल परिवर्तन, गर्भावस्था, मेनोपॉज़ और ऑटोइम्यून स्थितियों के कारण महिलाओं में थायरॉइड की समस्या होने की संभावना अधिक होती है। बच्चे होने के बाद थायरॉइड संबंधी विकार विशेष रूप से आम हैं।

थायरॉइड रोग का निदान कैसे किया जाता है?

थायरॉइड विकारों का निदान आमतौर पर ब्लड टेस्ट के माध्यम से किया जाता है, जैसे:

टीएसएच, टी3 और टी4 लेवल, इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या अन्य परीक्षण कराने की सलाह भी दे सकते हैं।

क्या तनाव थायरॉइड की समस्या का कारण बन सकता है?

केवल तनाव से सीधे तौर पर थायरॉइड रोग नहीं होता है, लेकिन लंबे समय तक तनाव रहने से हार्मोन संतुलन बिगड़ सकता है और पहले से मौजूद थायरॉइड की स्थिति और खराब हो सकती है।

क्या थायरॉइड की समस्या से वजन बढ़ सकता है?

हाँ। हाइपोथायरायडिज्म आपके मेटाबोलिज्म को धीमा कर सकता है, जिससे वजन बढ़ना, थकान और सुस्ती हो सकती है।

क्या थायरॉइड रोग का इलाज संभव है?

कई थायरॉइड स्थितियों को दवा और जीवनशैली में बदलाव से नियंत्रित किया जा सकता है। कुछ स्थितियों में लंबे समय के उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

क्या थायरॉइड की समस्या गर्भावस्था को प्रभावित कर सकती है?

हाँ। थायरॉइड का इलाज नहीं कराने से प्रजनन क्षमता, गर्भावस्था और शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड का सही इलाज काफी महत्वपूर्ण है।

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