दिल की अनियमित धड़कन को नहीं करें नजरअंदाज: हो सकते हैं अरिदमिया के लक्षण

क्या आपने कभी शांत बैठे हुए ही अचानक अपने दिल की धड़कन को तेज़ होते महसूस की है? या आपने कभी दिल में फड़फड़ाहट, ज़ोर से धड़कने या धड़कन के बीच में रुकने जैसा कुछ महसूस किया है? ये अनुभव चिंताजनक हो सकते हैं, यह अरिदमिया के लक्षण हो सकते हैं। हालांकि दिल की तेज धड़कन हमेशा किसी गंभीर समस्या का संकेत नहीं होते। फिर भी, अगर ये बार-बार हों या इनके साथ चक्कर आना, सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ़ जैसे लक्षण भी हों, तो इन्हें कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

दरअसल हमारा दिल एक बेहतरीन तालमेल वाली मशीन की तरह काम करता है, जो एक जटील इलेक्ट्रिकल सिस्टम से चलता है और हर धड़कन को नियंत्रित करता है। जब इस इलेक्ट्रिकल सिस्टम में कोई गड़बड़ी होती है, तो दिल बहुत तेज़, बहुत धीमा या अनियमित रूप से धड़क सकता है; इस स्थिति को अरिदमिया कहते हैं। कुछ अरिदमिया नुकसानदायक नहीं होते, लेकिन कुछ हार्ट को खून पंप करने की क्षमता में बाधा डाल सकते हैं और हार्ट फेलियर, स्ट्रोक या अचानक कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ा सकते हैं।

हर धड़कन एक इलेक्ट्रिकल सिग्नल (इम्पल्स) से शुरू होती है जो दिल में एक निश्चित क्रम में आगे बढ़ती है। यह तालमेल वाली इलेक्ट्रिकल गतिविधि दिल की धड़कन को एक स्थिर लय में बनाए रखती है। जब ये इलेक्ट्रिकल सिग्नल असामान्य हो जाते हैं, तो दिल की लय बदल जाती है। यह सामान्य से तेज़ (टैकीकार्डिया), सामान्य से धीमा (ब्रैडीकार्डिया) या अनियमित पैटर्न में धड़क सकता है। नतीजतन, दिल प्रभावी ढंग से खून पंप नहीं कर पाता, जिससे शरीर के ज़रूरी अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है और फिर कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

आजकल, लोगों के कार्डियोलॉजिस्ट के पास जाने का एक आम कारण ‘पल्पिटेशन’ (palpitations) है – यानी दिल का तेज़ धड़कना, फड़फड़ाना, ज़ोर से धड़कना या धड़कन का बीच में रुकना महसूस होना। अच्छी बात यह है कि हर बार पल्पिटेशन महसूस होने का मतलब दिल की बीमारी नहीं होता। स्वस्थ लोगों को भी भावनात्मक तनाव, चिंता, बहुत ज़्यादा कैफीन लेने, ज़ोरदार कसरत करने या हाई ब्लड प्रेशर के कारण पल्पिटेशन महसूस हो सकता है। कभी-कभी, ज़ोरदार लेकिन सामान्य धड़कन भी पल्पिटेशन जैसा एहसास करा सकती है। हालांकि, अगर पल्पिटेशन बार-बार हो, कई मिनट तक रहे, या उसके साथ चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ़, सीने में बेचैनी या बेहोशी जैसी समस्याएँ हों, तो तुरंत डॉक्टर से जाँच करवानी चाहिए।

अरिदमिया आमतौर पर तब होता है जब दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम या दिल की बनावट में कोई समस्या होती है। कुछ खास मेडिकल स्थितियाँ इसका खतरा काफी बढ़ा देती हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़, या पहले एंजियोप्लास्टी या कोरोनरी स्टेंटिंग करवा चुके लोगों में दिल की धड़कन के असामान्य होने (एरिदमिया) का खतरा ज़्यादा होता है। दिल की बनावट से जुड़ी बीमारियाँ भी उन इलेक्ट्रिकल रास्तों को प्रभावित कर सकती हैं जो दिल की धड़कन को कंट्रोल करते हैं।

यही वजह है कि जिन लोगों को ये समस्याएँ हैं, उन्हें बार-बार दिल की धड़कन तेज़ महसूस होने या बिना किसी वजह के थकान जैसे लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

अरिदमिया के साथ सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि ये आते-जाते रह सकते हैं। अगर मरीज़ को कभी-कभी लक्षण महसूस होते हैं, तब भी रूटीन जाँच पूरी तरह से सामान्य लग सकती है। अरिदमिया का सही पता लगाने के लिए, कार्डियोलॉजिस्ट ये जाँचें करवाने की सलाह दे सकते हैं: ECG, 2D ECHO और होल्टर मॉनिटरिंग।

पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मनदीप सिंह ने कुछ ज़रूरी सवालों के जवाब दिए हैं। आप उन्हें यहाँ पढ़ सकते हैं।

दिल की धड़कन का अनियमित होना (अरिदमिया) क्या है, मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे यह समस्या है, और यह दिल के सामान्य इलेक्ट्रिकल सिस्टम को कैसे प्रभावित करता है?

अरिदमिया का मतलब है दिल की धड़कन का असामान्य होना। यह धीमी, तेज़ या अनियमित धड़कन हो सकती है। अरिदमिया होने पर मरीज़ों को दिल की धड़कन तेज़ महसूस होना (पल्पिटेशन) और साँस लेने में तकलीफ़ (डिस्पनिया) जैसे लक्षण महसूस होते हैं। यह दिल के काम करने की क्षमता पर बुरा असर डालता है।

क्या दिल की धड़कन का तेज़ महसूस होना (पल्पिटेशन) हमेशा दिल की बीमारी का संकेत होता है, या यह स्वस्थ लोगों में भी हो सकता है?

पल्पिटेशन का मतलब है दिल की धड़कन का असामान्य और असहज महसूस होना। यह अरिदमिया का मुख्य लक्षण है। लेकिन यह सामान्य धड़कन के साथ भी हो सकता है, जैसे कि जब दिल ज़ोर से सिकुड़ता है या हाई ब्लड प्रेशर होता है।अरिदमिया के सबसे आम कारण क्या हैं, और किसे इसका ज़्यादा खतरा होता है? अरिदमिया का पता कैसे लगाया जाता है, और आमतौर पर कौन सी जाँचें करवाने की सलाह दी जाती हैअरिदमिया तब होता है जब दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम की बनावट या काम करने के तरीके में कोई समस्या होती है। डायबिटीज, हाइपरटेंशन, डिस्लिपिडेमिया, मोटापा, कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ जैसी बीमारियों या कोरोनरी स्टेंटिंग का इतिहास रखने वाले लोगों में अरिदमिया का खतरा ज़्यादा होता है। अरिदमिया का पता लगाने के लिए मुख्य जाँचें ECG, इकोकार्डियोग्राफी और होल्टर मॉनिटरिंग हैं।दिल की धड़कन के अनियमित होने को कब मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए, और किन लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए?

अगर अनियमित धड़कन के साथ सीने में तेज़ दर्द, साँस लेने में तकलीफ़, लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) या बेहोशी जैसी समस्याएँ हों, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। हार्ट फेलियर, स्ट्रोक या हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं से बचने के लिए अस्पताल जाकर जांच करवानी चाहिए।

अरिदमिया (दिल की धड़कन की अनियमितता) के लिए इलाज के क्या विकल्प हैं और डॉक्टर सबसे सही तरीका कैसे तय करते हैं?

अरिदमिया का इलाज एंटी-अरिदमिक दवाओं, दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाले इंजेक्शन और पेसमेकर के ज़रिए किया जाता है। इम्प्लांट, AICD डिवाइस, CRT डिवाइस वगैरह। सबसे अच्छा तरीका हर मामले की अलग-अलग स्थिति के आधार पर फ़ैसला लेना है।

क्या अरिदमिया (arrhythmia) को रोका जा सकता है, खासकर दिल की बीमारी या डायबिटीज़ वाले लोगों में?

एंटी-अरिथमिक दवाएं, दिल की धड़कन को कंट्रोल करने वाले इंजेक्शन और एंटीकोआगुलंट दवाओं का इस्तेमाल करके अतालता को रोका जा सकता है। पेसमेकर और AICD इम्प्लांट बेहोशी के दौरों या गंभीर अतालता जैसे CHB, VT, VF वगैरह को रोक सकते हैं।

आप क्या सलाह देंगे जिसे हाल ही में अरिदमिया का पता चला है?

जिस मरीज़ को हाल ही में अरिदमिया का पता चला है, उसे सही ढंग से टेस्ट (इको, होल्टर टेस्ट) करवाना चाहिए, क्लिनिकली जांच (CHADsVaSC स्कोरिंग) करवानी चाहिए और इलाज के लिए लिए गए फ़ैसले (सिर्फ़ दवाओं से इलाज, या पेसमेकर, AICD, CRT इम्प्लांट वगैरह की ज़रूरत) का पालन करना चाहिए। हमारे अस्पताल में सभी सेवाएं उपलब्ध हैं।

अगर आपके मन में भी अनियमित हार्ट बिट से जुड़ा कोई सवाल है, तो कृपया अपने नज़दीकी उजाला सिग्नस अस्पताल से संपर्क करें। आप askadoctor@ujalacygnus.com पर हमारे हेल्थ एक्सपर्ट से भी संपर्क कर सकते हैं या डॉ. मनदीप सिंह के साथ अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं।

FAQ

क्या जीवनशैली में बदलाव अरिदमिया को रोकने में मदद कर सकते हैं?

हां, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखना, स्वस्थ वज़न बनाए रखना, नियमित रूप से व्यायाम करना, धूम्रपान से बचना और शराब व कैफ़ीन का सेवन सीमित करना जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

क्या अरिदमिया का इलाज हो सकता है?

कई तरह की अरिदमिया को दवाओं, जीवनशैली में बदलाव या प्रक्रियाओं जैसे पेसमेकर इम्प्लांटेशन, AICD या कैथेटर-आधारित इलाज से प्रभावी ढंग से कंट्रोल किया जा सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि इसकी असल वजह क्या है।

क्या तनाव और एंग्जायटी (चिंता) से दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है?

हां, तनाव, एंग्जायटी, नींद की कमी और भावनात्मक परेशानी से धड़कन तेज़ होना (palpitations) या कुछ खास तरह की अरिदमिया हो सकती है, खासकर उन लोगों में जिन्हें इसका खतरा ज़्यादा होता है।

क्या कैफ़ीन या शराब से अरिदमिया हो सकती है?

हां, कैफ़ीन, शराब, एनर्जी ड्रिंक्स का ज़्यादा सेवन या धूम्रपान से कुछ लोगों में दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है। सीमित मात्रा में सेवन करने की सलाह दी जाती है, खासकर अगर आपको पहले अरिदमिया की समस्या रही हो।

क्या मेरा दिल स्वस्थ होने पर भी अरिदमिया हो सकती है?

हां, कुछ तरह की अरिदमिया स्वस्थ लोगों में भी हो सकती है और हो सकता है कि वे नुकसानदायक न हों। हालांकि, लगातार या बार-बार होने वाले लक्षणों की हमेशा जांच करवानी चाहिए ताकि दिल की किसी छिपी हुई बीमारी का पता लगाया जा सके।

क्या व्यायाम अरिदमिया ठीक करने में मदद कर सकता है या उसे और खराब कर सकता है?

नियमित, मध्यम व्यायाम हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। हालांकि, जिन लोगों को अरिदमिया (arrhythmias) का निदान हो चुका है, उन्हें व्यायाम शुरू करने या उसमें बदलाव करने से पहले अपने हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि कुछ लय संबंधी विकारों के लिए गतिविधि पर प्रतिबंध की आवश्यकता हो सकती है।

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