आगरा। सर्जरी और दवाओं के हेवी डोज के बगैर वजन घटाने के लिए अब मरीजों को बड़े शहरों की ओर रूख करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनका यह सपना अब आगरा में भी साकार हो सकता है। मोटापे की बीमारी या टाइप-2 डायबिटीज की समस्या से पीडि़त मरीजों को वजन नियंत्रित करने की बैलून विधि (intra-gastric SPATZ balloon) उनके जीवन में मील का पत्थर साबित हो सकती है। उजाला सिग्नस रेनबो अस्पताल में बैलून विधि से मिनिमल इंवेसिव सर्जरी प्रक्रिया के जरिए एक 60 वर्षीय मरीज की जिंदगी बदल दी गई।
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अनिमेष गुप्ता ने बताया कि मरीज मोटापे और टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहा था। वह काफी दिनों से परेशान था। जांच के बाद ऑपरेशन के जोखिम को देखते हुए उन्होंने मरीज के इलाज के लिए एक नया और सुरक्षित रास्ता चुना। मरीज को हल्की नींद (कॉन्शियस सेडेशन) दी गई, जिससे उसे कोई दर्द नहीं हुआ। इसके बाद एंडोस्कोपी की मदद से एक खास सिलिकॉन गुब्बारे को पेट के अंदर डाला गया और उसे स्टेराइल खारे पानी (सेलाइन) से भर दिया गया। यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी चीर-फाड़ के मात्र 20 मिनट में पूरी हुई। इसके बाद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। इस प्रक्रिया से मरीज को कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। पानी का गुब्बारा पेट में फटने का डर नहीं है लेकिन ऐसा होता है तो भी पानी बड़ी आसानी से पेशाब के जरिए बाहर निकल जाता है।
गुब्बारे की खासियत और फायदा
यह एफडीए-अप्रूव्ड है, यानी पूरी तरह सुरक्षित और मान्यता प्राप्त। इस बैलून को 12 महीने तक पेट में रखा जा सकता है। जिससे मरीजों को कम भूख लगती है और कम खाने से भी उनका पेट भर जाता है। धीरे-धीरे उनकी जीवनशैली में सुधार होने लगता है और उन्हें इसकी आदत पड़ जाती है। जरूरत पड़ने पर इस बैलून का आकार (साइज) को बढ़ाया या घटाया भी जा सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, उचित डाइट और व्यायाम के साथ यह गुब्बारा मरीज के 15-20% वजन को कम करने में सहायक होता है।
डॉ गुप्ता के मुताबिक, वजन घटने से ब्लड शुगर सामान्य होने लगता है और दवाइयों पर निर्भरता काफी कम हो जाती है। जो मरीज मोटापे की सर्जरी (बेरिएट्रिक सर्जरी) से डरते हैं या जिनकी सेहत सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होती, उनके लिए यह एक सुरक्षित, असरदार और बिना चीर-फाड़ वाला विकल्प है।
डॉ. गुप्ता ने आगे बताया कि यह तकनीक उन सभी मरीजों के लिए वरदान है, जिन्हें काफी वजन घटाना है लेकिन वे किसी कारण सर्जरी के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में मोटापे और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने के लिए नॉन-सर्जिकल थेरेपी का इलाज हो सकती है।